छत्तीसगढ़

कबीरधाम की महिलाओं का बढ़ता कदम : बिहान योजना से संवर रहा भविष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कबीरधाम जिले की ग्रामीण महिलाएँ अब स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से ये महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान भी बना रही हैं।

मछली पालन बना आर्थिक आजादी का जरिया

बोड़ला विकासखंड की हेमिन रात्रे और मीना रात्रे इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। कभी घर की चहारदीवारी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएँ ‘जय सतनाम स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं। उन्होंने पारंपरिक कार्यों से हटकर वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन को अपनाया।

सफलता का सफर: प्रशिक्षण से आय तक

अपनी इस यात्रा के बारे में वे बताती हैं कि शुरुआत में इच्छा होने के बावजूद संसाधनों की कमी एक बड़ी बाधा थी। बिहान योजना ने उन्हें न केवल वित्तीय ऋण उपलब्ध कराया, बल्कि मछली पालन के लिए आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया।

सामुदायिक पहल: समूह की मदद से सामुदायिक तालाब में मछली पालन शुरू किया गया।

वैज्ञानिक पद्धति: समय पर चारा और उचित देखरेख के कारण उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई।

आर्थिक स्थिरता: आज वे मछली बेचकर इतनी आय अर्जित कर रही हैं कि घर के खर्चों के साथ-साथ भविष्य के लिए बचत भी कर पा रही हैं।

आत्मविश्वास और सम्मान में वृद्धि

मछली पालन से हुई आय ने केवल उनकी आर्थिक स्थिति ही नहीं सुधारी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दी है। हेमिन और मीना का कहना है कि अब समाज और रिश्तेदारों के बीच उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है। वे अब परिवार की आय में बराबर की भागीदार हैं।

कबीरधाम की इन ‘लखपति दीदियों’ की सफलता आज जिले की हजारों अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है, जो यह साबित करती है कि सही अवसर और सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।

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