छत्तीसगढ़

हौसलों की उड़ान : शारीरिक बाधाओं को मात देकर ई-रिक्शा से सफलता का सफर तय कर रही हैं सायरा बानो

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की रहने वाली सायरा बानो आज उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं, जो विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं। शारीरिक दिव्यांगता और आर्थिक तंगी जैसी दोहरी चुनौतियों के बावजूद, सायरा ने अपनी मज़बूत इच्छाशक्ति से अपनी तकदीर बदल दी है।

संघर्ष से संकल्प तक का सफर

एक समय था जब सायरा के पास आय का कोई ठोस जरिया नहीं था। गरीबी के कारण रोजमर्रा का गुजारा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन अपनी स्थिति पर आंसू बहाने के बजाय, उन्होंने स्वाभिमान के साथ जीने का फैसला किया। सायरा ने जिला प्रशासन से संपर्क कर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा जाहिर की।

प्रशिक्षण और प्रशासन का साथ

सायरा के जुनून को देखते हुए प्रशासन ने उनका पूरा सहयोग किया। उन्हें बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया।

तकनीकी कौशल: सायरा ने ई-रिक्शा चलाने की बारीकियों को सीखा।

सुरक्षा और नियम: पुलिस विभाग की मदद से उन्हें यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

सक्षम प्रोजेक्ट: समाज कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग के साझा प्रयास से ‘सक्षम प्रोजेक्ट’ के तहत उन्हें अपना ई-रिक्शा प्राप्त हुआ।

सफलता की नई राह

आज सायरा धमतरी की सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ अपना ई-रिक्शा चलाती नजर आती हैं।

प्रतिदिन की आय: वे अब रोज 300 से 500 रुपये कमा रही हैं।

आत्मनिर्भरता: इस आमदनी से वे न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक जीवन भी जी रही हैं।

“मजबूत इरादे और मेहनत हो, तो कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।”

सायरा बानो की यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और व्यक्ति का अपना दृढ़ संकल्प मिलकर किसी भी जीवन में उजाला ला सकते हैं। उनकी सफलता आज न केवल दिव्यांगजनों को, बल्कि पूरे समाज को प्रेरित कर रही है।

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