खेतों की पगडंडियों से मैराथन के शिखर तक : कोण्डागांव के संजय ने रचा इतिहास

कोण्डागांव। कोण्डागांव के ग्राम चिलपुटी के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले संजय कोर्राम ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। हाल ही में आयोजित ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन’ में संजय ने अपनी अद्भुत गति और सहनशक्ति का परिचय देते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
संघर्षों के बीच चमकती प्रतिभा
संजय की यह उपलब्धि केवल एक खेल की जीत नहीं, बल्कि उनके कड़े संघर्ष की कहानी है। पिछले 4-5 वर्षों से लगातार अभ्यास कर रहे संजय के कंधों पर घर की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। पिता के निधन के बाद, अपनी माता और भाइयों के साथ वे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। हालांकि उनका एक भाई सेना में है और दूसरा पढ़ाई कर रहा है, लेकिन घर की खेती-किसानी और मक्के की फसल की पूरी देखरेख संजय स्वयं करते हैं।
जुनून जो कभी कम नहीं हुआ
संजय कभी भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपने कदम घर से दूर नहीं ले जा सके, लेकिन उन्होंने अपने दौड़ने के शौक को मरने नहीं दिया। उनकी मेहनत के परिणाम पहले भी राज्य स्तर पर दिख चुके हैं:
अबूझमाड़ मैराथन: पांचवां स्थान
भिलाई स्टील प्लांट दौड़: दसवां स्थान
स्थानीय प्रतियोगिताएं: कोण्डागांव जिले की लगभग हर दौड़ में संजय का ही दबदबा रहता है।
एक प्रेरणादायक सफर
सोशल मीडिया के जरिए बस्तर हेरिटेज मैराथन की जानकारी मिलने पर संजय ने इसमें हिस्सा लिया और जीत हासिल कर अपने गांव का नाम पूरे प्रदेश में ऊंचा कर दिया। खेतों की मेड़ों पर पसीना बहाने वाले इस युवा की सफलता आज बस्तर के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
















