छत्तीसगढ़

संघर्ष से सफलता तक : हरमनिया देवी के ‘लखपति दीदी’ बनने की प्रेरक गाथा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘बिहान’ योजना (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके सपनों को उड़ान देने वाला एक सशक्त माध्यम बन गई है। इसका जीवंत उदाहरण हैं सरगुजा जिले के मेंड्राकला गाँव की श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े। कभी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस के लिए परेशान रहने वाली हरमनिया आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

बदलाव की शुरुआत: स्वयं सहायता समूह का साथ

हरमनिया देवी का जीवन तब बदला जब वे आकांक्षा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने साहस जुटाया और स्वरोजगार की राह चुनी।

पहला कदम: समूह से ऋण लेकर उन्होंने गाँव में एक छोटी सी किराना और श्रृंगार की दुकान खोली।

ईमानदारी और विस्तार: व्यापार से होने वाली कमाई से उन्होंने न केवल अपना कर्ज चुकाया, बल्कि दोबारा ऋण लेकर कपड़े का व्यवसाय भी शुरू किया।

वर्तमान स्थिति: आज वे दो सफल व्यवसायों का संचालन कर रही हैं।

शिक्षा के सपने हुए साकार

आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे सुखद परिणाम हरमनिया के बच्चों की शिक्षा पर दिखा। जिस माँ के पास कभी बुनियादी शिक्षा के लिए पैसे नहीं थे, आज उनके बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वे बिना किसी वित्तीय दबाव के अपने बच्चों के भविष्य को संवार रही हैं।

सरकार की नीतियों के प्रति आभार

अपनी इस कामयाबी का श्रेय हरमनिया देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार को दिया है। उनका कहना है कि:

“बिहान योजना ने हम जैसी ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर समाज में सम्मान दिलाया है और हमें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।”

आज हरमनिया देवी छत्तीसगढ़ की उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो अपनी मेहनत और सरकार के सहयोग से ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं।

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