छत्तीसगढ़

हिंसा त्याग मुख्यधारा में लौटें साथी : पूर्व नक्सली नेता रामधेर मज्जी की भावुक अपील

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर जंगलों में सक्रिय अपने पूर्व साथियों से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह किया है।

“हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा”

हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले मज्जी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ले जाता है। उन्होंने बस्तर, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश (MMC जोन) में सक्रिय माओवादियों, विशेषकर दक्षिण बस्तर के बड़े नेता पापाराव और अन्य कैडरों को संबोधित करते हुए कहा कि वे उन नेताओं से सीख लें जिन्होंने सरेंडर कर शांतिपूर्ण जीवन चुना है।

रामधेर मज्जी का सफर

पद: पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य (MMC जोन)।

सरेंडर: 8 दिसंबर को राजनांदगांव में सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया।

संदेश का सार: पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और विकास का हिस्सा बनें।

बस्तर में आत्मसमर्पण की लहर

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च की समयसीमा के करीब आते ही, सरेंडर करने वाले नक्सलियों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है:

महासमुंद: हाल ही में BBM कमेटी के 15 नक्सलियों (9 महिलाएं, 6 पुरुष) ने बलोदा थाने में आत्मसमर्पण किया।

सुकमा और बीजापुर: 7 फरवरी को एक बड़ी सफलता के तहत सुकमा में 21 और बीजापुर में 30 नक्सलियों ने हथियार डाले।

बड़ी उपलब्धि: सुकमा में सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद किए गए हैं।

सरकार की सख्त घेराबंदी और प्रभावी पुनर्वास नीति के कारण नक्सलियों के भीतर अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई है। रामधेर मज्जी जैसे कद्दावर नेताओं की अपील और लगातार हो रहे एनकाउंटर्स ने जमीन पर सक्रिय नक्सलियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे बंदूक का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र में विश्वास जताएं।

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