‘आदि परब’ का भव्य समापन : छत्तीसगढ़ी संस्कृति ने रचा इतिहास, मिला ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’

नवा रायपुर। नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) में आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘आदि परब’ का समापन हर्षोल्लास के साथ हुआ। ‘परंपरा से पहचान तक’ के ध्येय वाक्य के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल जनजातीय गौरव को प्रदर्शित किया, बल्कि अपनी विशिष्ट चित्रकला और पारंपरिक परिधानों के लिए ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराकर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया।
बस्तर में शांति और विकास का नया युग
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बस्तर क्षेत्र, जो दशकों से नक्सलवाद के साये में था, अब शांति और खुशहाली की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ जल्द ही पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।
सांस्कृतिक एकता का अनूठा संगम
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि:
प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों ने एक साझा मंच पर अपनी सांस्कृतिक विविधता पेश की।
पारंपरिक शिल्प, कला, हाट-बाजार और आदिवासी व्यंजनों का संगम इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा।
आधुनिकता के दौर में अपनी विलुप्त होती विरासत को सहेजना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।
शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर जोर
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय युवाओं के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया:
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: इसके तहत 6,691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है।
पीएम जनमन योजना: विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) को सड़क, बिजली और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं।
नियत नेल्लानार योजना: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के गांवों तक शासन की योजनाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।
डिजिटल संग्रहालय और गौरवशाली इतिहास
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय’ का उद्घाटन किया गया था। यह संग्रहालय और परिसर में स्थित अन्य जनजातीय संग्रहालय हमारी संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रतिभाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज का गौरव बढ़ाने वाले युवाओं को सम्मानित किया:
UPSC में सफल होने वाले अंकित साकिनी और डायमंड ध्रुव का सम्मान किया गया।
IIT और NIT में चयनित ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालय के छात्रों को लैपटॉप के चेक प्रदान किए गए।
सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी हुआ।
इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी शासन द्वारा शिक्षा और विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में भारी संख्या में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
















