दिन में इडली-डोसा की दुकान, रात में सूने मकानों पर हाथ साफ : रायपुर-दुर्ग के बीच सक्रिय अंतर्राज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश

दुर्ग। दुर्ग पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह को दबोचा है जो बेहद चालाकी से “डबल लाइफ” जी रहा था। ये आरोपी रायपुर में आम दुकानदारों की तरह इडली-डोसा बेचते थे, लेकिन अंधेरा होते ही दुर्ग के ग्रामीण इलाकों में चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सहित उनके मददगारों को भी गिरफ्तार किया है।
चोरी का अनूठा तरीका: रेकी और ठिकाना बदलना
पकड़े गए आरोपियों का नेटवर्क काफी फैला हुआ था। मुख्य आरोपी मनीष अमोरिया, जिस पर राजनांदगांव में पहले से ही 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं, अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस गिरोह को चला रहा था।
ठिकाना: ये तीनों राजनांदगांव के मूल निवासी हैं, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए रायपुर के मठपुरैना में रह रहे थे।
काम: दिन के समय ये रायपुर में इडली-डोसा का स्टॉल लगाते थे ताकि किसी को शक न हो।
वारदात: रात में ये दुर्ग के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बंद मकानों की रेकी करते और वहां से गहने व नकदी पार कर देते थे।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
दुर्ग के अलग-अलग थानों में लगातार दर्ज हो रही शिकायतों ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी थी। पुलिस ने तकनीक और जमीनी नेटवर्क का सहारा लिया:
घटनास्थलों के CCTV फुटेज खंगाले गए।
सैकड़ों मोबाइल टावर डंप डेटा का विश्लेषण किया गया।
संदिग्धों की घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में लिया गया, जिसके बाद पूरी कहानी सामने आई।
चोरी का माल खरीदने वाले भी पुलिस की गिरफ्त में
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दुर्ग में चोरी किए गए जेवरात राजनांदगांव के तीन खरीदारों को बेच देते थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चोरी का सामान खरीदने वाले उन तीनों व्यक्तियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। वर्तमान में पुलिस इन आरोपियों से अन्य संभावित वारदातों के बारे में पूछताछ कर रही है।
















