आयकर रिफंड में फर्जीवाड़े का खुलासा : एक लाख टैक्सपेयर्स के दावों में मिली भारी गड़बड़ी

नई दिल्ली (एजेंसी)। आयकर विभाग ने रिफंड दावों की गहन जांच के बाद एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। विभाग द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आया है कि लगभग एक लाख करदाताओं ने रिफंड पाने के लिए गलत तरीके से टैक्स छूट (Deductions) के दावे पेश किए थे। इस विसंगति के कारण बड़ी संख्या में रिफंड रोक दिए गए हैं और विभाग अब इन मामलों की बारीकी से जांच कर रहा है।
किन क्षेत्रों में की गई हेराफेरी?
जांच के दौरान विभाग ने पाया कि टैक्स बचाने और रिफंड लेने के लिए कई तरह के फर्जी हथकंडे अपनाए गए:
राजनीतिक चंदा: कई रिटर्न में राजनीतिक दलों को बड़ा चंदा देना दिखाया गया, लेकिन जांच में पता चला कि वह पैसा कभी संबंधित दल के बैंक खाते में पहुँचा ही नहीं।
NGO को फर्जी दान: कागजों पर एनजीओ को दान देने की रसीदें लगाई गईं, जबकि असल में कोई वित्तीय लेनदेन नहीं हुआ था।
किराया और बच्चों की फीस: मकान किराए (HRA) और बच्चों की ट्यूशन फीस के दावों में भी बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज पाए गए।
AI और अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई
शुरुआत में इन संदिग्ध मामलों की पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए की गई थी। विसंगतियां दिखने के बाद आयकर अधिकारियों ने व्यक्तिगत स्तर पर जांच शुरू की। जिन करदाताओं पर संदेह था, उन्हें नोटिस जारी कर सबूत मांगे गए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कई लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए ‘संशोधित रिटर्न’ (Revised ITR) दाखिल किया है।
पुरानी फाइलों की भी होगी जांच: आयकर विभाग के अनुसार, कुछ करदाता पिछले 6-7 वर्षों से लगातार इसी तरह के फर्जी दावे कर रहे हैं। ऐसे मामलों में पिछले वर्षों का भी हिसाब मांगा जा रहा है और दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रिफंड कब तक मिलेगा?
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने स्पष्ट किया है कि:
जिन करदाताओं के रिटर्न सही पाए गए हैं और जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन्हें अगले एक महीने के भीतर रिफंड मिल जाएगा।
जिन मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, वहां रिफंड तभी जारी होगा जब करदाता अपने दावों को सही साबित कर देंगे।
रिफंड में देरी होने पर क्या करें?
यदि आपका रिफंड अब तक नहीं आया है, तो आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
माध्यम,संपर्क का तरीका
हेल्पलाइन नंबर,CPC बेंगलुरु के टोल-फ्री नंबर 18001030025 या 18004190025 पर कॉल करें।
ई-फाइलिंग पोर्टल,’Know Your AO’ विकल्प पर जाकर अपने क्षेत्राधिकार निर्धारण अधिकारी से संपर्क करें।
शिकायत दर्ज करें,पोर्टल पर मौजूद ‘e-Grievance’ विकल्प का उपयोग कर अपनी समस्या बताएं।














