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भारत-रूस व्यापार संबंध : पुतिन की यात्रा से व्यापार घाटे में कमी और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

नई दिल्ली (एजेंसी)। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी यात्रा के दौरान, भारत का मुख्य ध्यान रूस के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने पर केंद्रित रहेगा। भारत कई समझौतों के माध्यम से फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए रूस में नए बाजारों की तलाश कर रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन द्वारा प्रस्तावित “नो लिमिट्स पार्टनरशिप” पहल से भारत के रक्षा क्षेत्र में “मेड इन इंडिया” अभियान को मजबूती मिलने की संभावना है, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी हस्तांतरण का भी लाभ मिलेगा।

व्यापार असंतुलन और आयात-निर्यात

पिछले वर्ष, भारत और रूस के बीच लगभग 63.6 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया था। चिंता का विषय यह है कि इसमें भारत का निर्यात केवल 5.6 अरब डॉलर ही था। दोनों देशों के बीच पिछले साल व्यापार में 12% की बढ़ोतरी का मुख्य कारण भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में तेल का आयात करना था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पुतिन के दौरे में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के संभावित फैसलों से दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात के अंतर (व्यापार घाटा) में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है।

टैरिफ का असर कम करने की रणनीति

रूस से तेल आयात के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए, भारत ने उन वस्तुओं के लिए नए बाजारों की तलाश की, जिनका निर्यात सर्वाधिक अमेरिका को होता था। इस प्रयास में भारत ने कई यूरोपीय और अरब देशों में अपना निर्यात बढ़ाया, जिससे अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में सफलता मिली। रूस का इस कड़ी में जुड़ना, टैरिफ के प्रभाव को और भी कम करेगा।

भू-राजनीतिक महत्व और रणनीतिक स्वायत्तता

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की इस यात्रा को केवल कुछ बड़े करारों पर हस्ताक्षर तक सीमित रखना इसके महत्व को कम करना होगा। इससे कहीं अधिक, यह दौरा भू-राजनीतिक संदेश के संबंध में है।

भारत यह स्पष्ट कर रहा है कि वह पश्चिमी देशों द्वारा थोपे गए “हमारे साथ या हमारे खिलाफ” के विकल्प को अस्वीकार करता है और अपनी स्वतंत्र राह चुनेगा।

रूस यह संदेश देना चाहता है कि यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों में वह केवल चीन पर निर्भर नहीं है।

भारत परोक्ष रूप से यह संकेत देना चाहता है कि वह वैश्विक शक्ति समीकरणों में बदलाव के बावजूद अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि इस दौरान रक्षा संबंधों पर कोई बड़ी घोषणा नहीं हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग पृष्ठभूमि में चुपचाप जारी रहेगा। उन्होंने पुतिन के दौरे के समय को महत्वपूर्ण बताया, यह देखते हुए कि पश्चिमी देश भारत पर यूक्रेन युद्ध रोकने में भूमिका नहीं निभाने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका मानना है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अलास्का में पुतिन के लिए लाल कालीन बिछा सकते हैं, तो भारत द्विपक्षीय संबंध क्यों मजबूत नहीं कर सकता?

वर्तमान में, भारत और रूस दोनों को एक-दूसरे की आवश्यकता है।

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