भारत-अमेरिका व्यापारिक तालमेल : अंतरिम समझौते के मुख्य बिंदु

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और अमेरिका ने अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए एक ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ के ढांचे को अंतिम रूप दिया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करेगा, बल्कि सामरिक और तकनीकी सहयोग को भी मजबूत करेगा। 13 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच शुरू हुई वार्ताओं का यह एक ठोस परिणाम है।
इस समझौते की 12 सबसे महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं:
- डेयरी क्षेत्र को मिली सुरक्षा
भारतीय पक्ष के लिए सबसे बड़ी जीत यह रही कि डेयरी उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। भारत अपने स्थानीय डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने में सफल रहा है।
- रूसी तेल पर निर्भरता में कमी
समझौते के तहत भारत रूस से तेल आयात कम करने या बंद करने की दिशा में कदम उठाएगा। इसके बदले में, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ दरों में रियायत देगा।
- पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariff) नीति
अमेरिका भारत से आने वाले कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों पर 18% की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करेगा। यह दर पाकिस्तान (19%), वियतनाम और बांग्लादेश (20%) जैसे प्रतिस्पर्धियों से कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिलेगी।
- कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क में कटौती
भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे मेवे (Almonds/Walnuts), ताजे फल, सोयाबीन तेल और वाइन/स्पिरिट्स पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती करेगा। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय उत्पादों के अधिक विकल्प मिलेंगे।
- विमान और जेनेरिक दवाओं को बड़ी राहत
अमेरिका ने विमान के पुर्जों, जेनेरिक दवाओं और रत्नों/हीरों पर से टैरिफ हटाने का निर्णय लिया है। इससे भारत के फार्मा और एविएशन सेक्टर को भारी लाभ होने की उम्मीद है।
- ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कोटा
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के तहत, भारतीय ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए एक विशेष रियायती टैरिफ दर कोटा निर्धारित किया गया है, जिससे भारतीय ऑटो पार्ट्स का निर्यात आसान होगा।
- गैर-शुल्कीय बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का अंत
दोनों देश व्यापार में आने वाली तकनीकी और कागजी बाधाओं को दूर करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों और आईटी उत्पादों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर सहमत हुआ है।
- ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ पर सख्ती
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समझौते का लाभ केवल भारत और अमेरिका को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को जो अपने माल को रूट बदलकर भेज रहा हो।
- $500 अरब की मेगा खरीद
अगले 5 वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, कोकिंग कोल और तकनीकी सामान खरीदने की योजना बना रहा है।
- हाई-टेक और GPU सहयोग
डेटा सेंटरों के लिए जरूरी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) और अन्य उच्च-तकनीकी उत्पादों के व्यापार में दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ाएंगे।
- डिजिटल ट्रेड और डेटा सुरक्षा
दोनों देश डिजिटल व्यापार में आने वाली बाधाओं और भेदभावपूर्ण प्रथाओं को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि ई-कॉमर्स और टेक कंपनियों के लिए बेहतर माहौल बन सके।
- सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा
चीन जैसे तीसरे पक्ष की ‘गैर-बाजार नीतियों’ से निपटने के लिए भारत और अमेरिका सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और निवेश समीक्षाओं पर एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
निष्कर्ष: यह अंतरिम समझौता केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह दो बड़े लोकतंत्रों के बीच गहरे भरोसे का प्रतीक है। इससे भारत के मध्यम और लघु उद्योगों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी।
















