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भारत में ईंधन और रसोई गैस की स्थिति : सरकार ने शुरू की भविष्य की तैयारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया (मध्यांतर पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के भीतर पेट्रोल, डीजल या कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए नए नियम

सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है, जो पहले 15 दिन था।

तर्क: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक औसत परिवार साल में लगभग 7 सिलेंडर का उपयोग करता है, जिससे एक सिलेंडर करीब 50 दिन चलता है।

उद्देश्य: इस कदम का लक्ष्य बाजार में घबराहट वाली बुकिंग (Panic Booking) को रोकना और स्टॉक का समान वितरण सुनिश्चित करना है।

तेल की कीमतों पर क्या होगा असर?

पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई तात्कालिक योजना नहीं है। सरकार का मानना है कि:

जब तक कच्चे तेल की कीमतें $120 – $125 प्रति बैरल के दायरे में रहती हैं, तब तक तेल कंपनियों पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ेगा।

यदि कीमतें इस स्तर को पार करती हैं, तभी बाजार की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

घरेलू पीएनजी और सीएनजी को प्राथमिकता

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में तनाव की स्थिति को देखते हुए, जहाँ से गैस की बड़ी खेप गुजरती है, सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है:

घरेलू पीएनजी: पाइप वाली प्राकृतिक गैस के उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

सीएनजी: सीएनजी को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में रखा गया है, इसलिए इसकी कीमतों पर बड़े बदलाव की संभावना कम है।

औद्योगिक गैस: कुछ उद्योगों को गैस की आपूर्ति उपलब्धता के आधार पर ही की जाएगी ताकि घरेलू जरूरतों से समझौता न हो।

कमर्शियल सप्लाई में कटौती और उत्पादन पर जोर

सरकार ने होटल और अन्य औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में कमी करने का निर्णय लिया है। यदि संकट गहराता है, तो घरेलू रसोई की जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल सप्लाई को पूरी तरह रोका भी जा सकता है। इसके साथ ही:

रिफाइनरी को निर्देश: सभी भारतीय रिफाइनरियों को अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के बजाय एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।

आयात के वैकल्पिक स्रोत: सरकार ने अपनी निर्भरता केवल खाड़ी देशों पर न रखते हुए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से गैस आयात की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।

वैश्विक परिदृश्य और अमेरिका की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि वहां की कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं। ऐसे में युद्ध की अवधि और अमेरिका का रुख यह तय करेगा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार किस दिशा में जाएगा।

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