अबूझमाड़ के जंगलों में गूंजा ‘जन-गण-मन’ : जाटलूर घाटी में पहली बार शान से फहराया गया तिरंगा

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और घने जंगलों वाले क्षेत्र ‘अबूझमाड़’ में इस बार गणतंत्र दिवस का नजारा बेहद खास था। जाटलूर घाटी के जाटलूर गांव में इतिहास रचते हुए पहली बार देश का 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। आईटीबीपी (ITBP) के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी, जो इस क्षेत्र के मुख्यधारा से जुड़ने का एक बड़ा संकेत है।
खुशियों का संगम और सामूहिक भोज
इस ऐतिहासिक पल का आयोजन आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी के कमांडेंट रोशन सिंह असवाल के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम की कमान सहायक कमांडेंट राम कुमार मौर्य ने संभाली। तिरंगा फहराने के बाद स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। उत्सव यहीं नहीं रुका, बल्कि कैंप परिसर में एक विशाल सामूहिक भोज (प्रीतिभोज) का आयोजन भी हुआ, जिसमें जाटलूर और हारवेल गांव के लगभग 150 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए।
विकास की नई किरण: कैंप से मिलीं सुविधाएं
हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में यहाँ ई-सीओबी (E-COB) जाटलूर की स्थापना की गई है। इस कैंप के खुलने के बाद से क्षेत्र की सूरत बदल रही है:
स्वास्थ्य सेवा: ग्रामीणों को अब घर के पास ही निःशुल्क प्राथमिक उपचार मिल रहा है।
पेयजल की सुविधा: कैंप के बाहर राहगीरों के लिए शीतल जल और बैठने की उचित व्यवस्था की गई है।
भरोसे का माहौल: सुरक्षा बलों के मानवीय व्यवहार ने ग्रामीणों के मन से डर निकालकर विश्वास पैदा किया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की इस संवेदनशीलता ने उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है। जवानों के समर्पण और सेवा भाव के कारण अब अबूझमाड़ के लोग खुद को देश का हिस्सा महसूस कर रहे हैं।
















