कोड़ेनार की नई पहचान : स्वच्छता और स्वावलंबन का उभरता मॉडल

बस्तर। बस्तर जिले का बास्तानार क्षेत्र इन दिनों एक सकारात्मक बदलाव का गवाह बन रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन से यहाँ का कोड़ेनार ग्राम पंचायत अब एक ‘ओडीएफ प्लस मॉडल’ गांव के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। यह सफलता केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के व्यवहार में आए बड़े परिवर्तन का परिणाम है।
कचरा प्रबंधन से शुरू हुआ बदलाव
कोड़ेनार में स्वच्छता की इस मुहिम की शुरुआत सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से यानी स्थानीय बाजारों से हुई। पहले जहाँ घरों और बाजारों का कचरा खुले में फेंका जाता था, वहीं अब प्रशासन और ग्रामीणों के साझा प्रयासों से एक व्यवस्थित प्रणाली विकसित की गई है।
सक्रिय सहभागिता: जनपद पंचायत बास्तानार के अधिकारियों और कलस्टर समन्वयकों ने खुद जमीन पर उतरकर ग्रामीणों को जागरूक किया।
महिला शक्ति: स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने इस अभियान की कमान संभाली और घर-घर जाकर कचरा संग्रहण को एक नियमित प्रक्रिया बनाया।
प्रशिक्षण और तकनीकी सशक्तिकरण
सिर्फ बुनियादी ढांचा तैयार करना काफी नहीं था, इसलिए इसके सही संचालन के लिए कौशल विकास पर जोर दिया गया। ग्राम स्तर के प्रतिनिधियों और स्वच्छताग्राहियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
अपशिष्ट पृथक्करण: सूखे और गीले कचरे को अलग करने की तकनीक।
प्लास्टिक रिसाइक्लिंग: प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण कर उसे पर्यावरण के अनुकूल बनाना।
तरल अपशिष्ट प्रबंधन: गंदे पानी के सुरक्षित निपटान के लिए सोख्ता गड्ढों और नालियों का रखरखाव।
वित्तीय प्रबंधन: 15वें वित्त आयोग की राशि का पारदर्शिता के साथ स्वच्छता कार्यों में उपयोग।
जन-आंदोलन बनी स्वच्छता
दीवार लेखन, स्कूली बच्चों की रैलियों और घर-घर संपर्क के माध्यम से स्वच्छता के संदेश को हर व्यक्ति तक पहुँचाया गया। विशेष रूप से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (MHM) और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षित किया गया।
आज आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों के आपसी समन्वय ने स्वच्छता को कोड़ेनार की एक गौरवपूर्ण पहचान बना दिया है। बास्तानार का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणा का केंद्र है।
















