छत्तीसगढ़

कोरिया मॉडल : जल संरक्षण की नई मिसाल और जनभागीदारी का संकल्प

कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू हुआ यह प्रयास अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सशक्त जन आंदोलन बन चुका है।

जनभागीदारी से मिली राष्ट्रीय पहचान

कोरिया में जल संरक्षण के लिए चलाए गए “कैच द रेन” और राज्य सरकार के “मोर गांव मोर पानी” के तहत “आवा पानी झोंकी” अभियान को देश स्तर पर सराहा गया है।

प्रधानमंत्री की प्रशंसा: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कोरिया मॉडल का विशेष उल्लेख करते हुए इसे सामुदायिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन: केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने भी इस मॉडल को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया है, जिससे इसके व्यापक प्रभाव की पुष्टि होती है।

समस्या और समाधान: 5% मॉडल की अवधारणाकोरिया जिले में औसतन 1370 मिमी वर्षा होने के बावजूद, भौगोलिक बनावट के कारण पानी तेजी से बह जाता था, जिससे भूजल का पुनर्भरण नहीं हो पाता था। इस समस्या से निपटने के लिए “जल संचय जन भागीदारी अभियान” शुरू किया गया।

मुख्य रणनीतियाँ:5% मॉडल: किसानों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन का $5\%$ हिस्सा छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया।

संरचनात्मक विकास: मनरेगा के माध्यम से सोखता गड्ढे और अन्य वैज्ञानिक संरचनाओं का निर्माण किया गया।

सामाजिक भूमिका: ग्रामीण महिलाओं ने ‘नीर नायिका’ और युवाओं ने ‘जल दूत’ बनकर इस अभियान की कमान संभाली।

उपलब्धि और प्रभाव (वर्ष 2025-26)

वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस मुहिम के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं:

विवरण,सांख्यिकी / प्रभाव

कुल जल पुनर्भरण,लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर)
तुलनात्मक क्षमता,यह 230 से अधिक बड़े तालाबों की क्षमता के बराबर है।
भूजल स्तर में सुधार,”CGWB की रिपोर्ट के अनुसार, जल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई।”
2026 की प्रगति,”20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं।”

कोरिया मॉडल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जनभागीदारी का साथ मिलता है, तो बड़े बदलाव संभव हैं। शासन का संकल्प है कि जल संरक्षण के इस मॉडल को भविष्य में और अधिक विस्तार देकर प्रदेश के हर कोने को जल-समृद्ध बनाया जाए।

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