लखपति दीदी : महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि की मिसाल

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राज्यपाल और मुख्यमंत्री राजनांदगांव में लखपति दीदी सम्मेलन में हुए शामिल
रायपुर। राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित लखपति दीदी सम्मेलन में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महतारी वंदन योजना और नियद नेल्लानार योजना के तहत 69 लाख 15 हज़ार 273 लाभार्थियों को कुल 647 करोड़ 28 लाख 36 हज़ार 500 रुपये की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के माध्यम से वितरित की।
आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक
उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने लखपति दीदियों को आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आय बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके बढ़ते प्रभाव का उत्सव है। उन्होंने राजनांदगांव जिले को महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यहां महिलाएं आर्थिक और राजनीतिक दोनों ही क्षेत्रों में प्रगति कर रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की और बताया कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उपराष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि लखपति दीदी आंदोलन यह दर्शाता है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो वे परिवर्तन की गाथा खुद लिखती हैं।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की जीवंत तस्वीर
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की एक जीती-जागती तस्वीर है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, संकल्प और आत्मबल कैसे समृद्धि का एक नया अध्याय लिख सकता है।
उन्होंने बताया कि आज हर ज़िले में महिलाएं स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। उदाहरण के लिए:
बलरामपुर में महिलाएं बाड़ी विकास और विपणन में।
बस्तर में वनोपज से जैविक उत्पाद बनाने में।
कोण्डागांव में फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उन्होंने विशेष रूप से राजनांदगांव जिले का उल्लेख किया, जहां लगभग 40 हज़ार लखपति दीदियां बन चुकी हैं। इनमें से 208 दीदियां सालाना 5 लाख रुपये से अधिक और 26 दीदियां 10 लाख रुपये से अधिक का व्यवसाय कर रही हैं। राज्यपाल ने इसे केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हर दीदी की कहानी प्रेरणादायक है, और सामूहिक प्रयास से आत्मनिर्भरता एक हकीकत बन जाती है। राज्यपाल ने पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के कार्यों को नारी सशक्तिकरण का आदर्श बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश भर में महिला उद्यमिता और स्वरोज़गार की कई योजनाएं चल रही हैं, और छत्तीसगढ़ उन्हें ज़मीन पर उतारकर एक “सशक्त भारत, सशक्त छत्तीसगढ़” की मिसाल कायम कर रहा है।
लक्ष्य की ओर अग्रसर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 7 लाख 82 हज़ार लखपति दीदी बनाने का है, जिनमें से अब तक 4 लाख 93 हज़ार दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने नियद नेल्लानार योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इससे बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
नारी शक्ति की पहचान
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लखपति दीदी सम्मेलन को नारी शक्ति की पहचान और आत्मनिर्भरता की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले ने पीएम आवास निर्माण, जल संरक्षण या कुपोषण उन्मूलन जैसे अभियानों में नई ऊंचाइयां छुई हैं। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों के लिए पद्मश्री फूलबासन बाई यादव की भी प्रशंसा की।
इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष योगेशदत्त मिश्रा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला स्वसहायता समूह की सदस्य उपस्थित थीं।
















