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पैरों की जकड़न : सामान्य दर्द या किसी गंभीर बीमारी का संकेत?

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। अक्सर रात के सन्नाटे में या सुबह तड़के अचानक पैर की मांसपेशियों में एक तेज खिंचाव महसूस होता है। जिसे हम बोलचाल की भाषा में ‘नस पर नस चढ़ना’ या ‘क्रैंप’ (Cramps) कहते हैं, वह कभी-कभी इतना कष्टदायक होता है कि व्यक्ति दर्द से कराह उठता है। हालांकि यह समस्या कुछ ही पलों में ठीक हो जाती है, लेकिन इसे बार-बार नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

क्या होता है लेग क्रैंप?

मुख्य रूप से यह दर्द पैर के निचले हिस्से यानी काफ मसल्स (Calf Muscles) में होता है। मांसपेशियों के अचानक कड़े हो जाने या अपनी जगह से हल्का खिसकने के कारण ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर में बिजली का झटका लगा हो। आमतौर पर यह स्थिति एक से दो मिनट तक बनी रहती है और फिर मांसपेशियां स्वतः ही सामान्य हो जाती हैं।

इन कारणों से बढ़ सकती है समस्या

विशेषज्ञों के अनुसार, क्रैंप के सटीक कारण का पता लगाना कभी-कभी कठिन होता है, लेकिन कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

बढ़ती उम्र और गर्भावस्था: उम्र बढ़ने के साथ नसें कमजोर होने लगती हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं में पोषक तत्वों के बदलाव के कारण यह समस्या अधिक देखी जाती है।

दवाइयों का प्रभाव: ब्लड प्रेशर या मूत्रवर्धक (Diuretics) दवाओं के सेवन से शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ सकता है।

जीवनशैली: घंटों तक खड़े रहना, गलत तरीके से बैठना या शारीरिक सक्रियता की कमी (Sedentary Lifestyle) मांसपेशियों में अकड़न पैदा करती है।

डिहाइड्रेशन: शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी नसों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।

जब यह मामूली दर्द न रहे (गंभीर खतरे)

यदि आपको अक्सर पैरों में क्रैंप महसूस होता है, तो यह शरीर के भीतर पनप रही किसी बड़ी बीमारी का अलार्म हो सकता है। यह निम्नलिखित स्थितियों का संकेत हो सकता है:

किडनी की समस्याएं: एक्यूट या क्रोनिक किडनी फेल्योर के शुरुआती लक्षणों में मांसपेशियों का खिंचाव शामिल है।

लिवर रोग: सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में भी शरीर के अंगों में ऐंठन बढ़ जाती है।

हार्मोनल असंतुलन: थायराइड (Hypothyroidism) या एडिसन डिजीज जैसी स्थितियां।

अन्य बीमारियां: एनीमिया (खून की कमी), पार्किंसन डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर।

तत्काल राहत के लिए क्या करें?

अगर अचानक क्रैंप आ जाए, तो घबराने के बजाय ये तरीके अपनाएं:

स्ट्रेचिंग और मसाज: प्रभावित हिस्से को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें या हल्के हाथों से मालिश करें।

तलवों के बल चलें: दर्द के दौरान अपनी एड़ियों या तलवों के बल थोड़ा टहलने की कोशिश करें, इससे मांसपेशियां जल्दी रिलैक्स होती हैं।

हाइड्रेटेड रहें: दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।

चेतावनी: यदि यह समस्या रोज होने लगे या दर्द असहनीय हो जाए, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। यह किडनी या लिवर से जुड़ी समस्या हो सकती है, इसलिए तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

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