अमृतकाल में साहित्य उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में ‘रायपुर साहित्य उत्सव 2026’ का उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती (25 वर्ष) के उपलक्ष्य में आयोजित यह उत्सव देश की बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब बनकर उभरा है।
मुख्य आकर्षण और विमोचन
समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रदेश की विकास यात्रा और साहित्य पर केंद्रित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया:
छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों पर आधारित विशेष पुस्तिका और कॉफी टेबल बुक।
जे. नंदकुमार की कृति ‘नेशनल सेल्फहुड इन साइंस’।
प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक ‘लाल दीवारें, सफेद झूठ’।
राजीव रंजन प्रसाद की रचना ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’।
वैचारिक विमर्श और सांस्कृतिक विरासत
राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश ने प्रख्यात साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए छत्तीसगढ़ की प्राचीन भाषाई परंपरा की सराहना की। उन्होंने कबीर के काशी और कवर्धा के संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों की गहराई को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में बताया कि:
इस तीन दिवसीय ‘साहित्य के महाकुंभ’ में देशभर के 120 से अधिक विद्वान हिस्सा ले रहे हैं।
कुल 42 सत्रों के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर मंथन होगा।
यह आयोजन अमृतकाल और राज्य के रजत जयंती वर्ष की भावनाओं को समर्पित है।
युवाओं की भागीदारी और अटल जी का स्मरण
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की काव्य यात्रा को याद करते हुए कहा कि उनकी पंक्तियाँ आज भी समाज को संबल देती हैं। उन्होंने आपातकाल के दौरान साहित्यकारों के संघर्ष और दुष्यंत कुमार की रचनाओं का भी उल्लेख किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर इस आयोजन को हिंदी साहित्य के पुरोधाओं का सम्मान बताया।
विशेष नोट: डॉ. कुमुद शर्मा ने साहित्य को ‘सांस्कृतिक चेतना का माध्यम’ बताते हुए भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।
यह उत्सव न केवल स्थापित लेखकों बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच साबित हो रहा है।
















