छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का समापन : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने विकास यात्रा को सराहा

रायपुर। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह भव्य आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें राज्य की प्रगति, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास की उल्लेखनीय यात्रा का जश्न मनाया गया।
25 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा
उपराष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक रजत जयंती समारोह में शामिल होने पर अपनी खुशी व्यक्त की, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। उन्होंने कहा कि पाँच दिवसीय इस महोत्सव में लोगों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और प्रभावशाली बदलाव की झलक मिली है।
श्री राधाकृष्णन ने 1 नवंबर 2000 को राज्य के निर्माण में स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व को गर्व से याद किया। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर इस बात का उल्लेख किया कि एक पूर्व लोकसभा सांसद के रूप में उन्होंने राज्य पुनर्गठन विधेयक का समर्थन किया था। उन्होंने भारत के सबसे युवा राज्यों में से एक होने से लेकर सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रगति के एक मॉडल के रूप में उभरने तक, छत्तीसगढ़ की 25 साल की असाधारण यात्रा की प्रशंसा की।
नक्सलवाद पर जीत और जन कल्याण के प्रयास
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने नक्सलवाद के खतरे को समाप्त करने में राज्य की सफलता की सराहना की। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मज़बूत नेतृत्व के साथ-साथ राज्य सरकार, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को दिया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विकास और विश्वास ने छत्तीसगढ़ में भय और हिंसा का स्थान ले लिया है।
उपराष्ट्रपति ने उन लोगों की सराहना की जिन्होंने छत्तीसगढ़ की सफलता की नींव रखी है—इनमें किसान, जनजातीय समुदाय, उद्यमी, शिक्षक और युवा शामिल हैं। उन्होंने राज्य की अनुकरणीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की विशेष रूप से सराहना की, जो 72 लाख से अधिक लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करती है। उन्होंने पीडीएस को सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को बधाई भी दी।
आदिवासी विरासत और बुनियादी ढांचा
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए आदिवासी समुदायों को विशेष सम्मान दिया। उन्होंने आदिवासी समुदायों की बुद्धिमत्ता, संस्कृति और सतत जीवन शैली की प्रशंसा की, जो आज के पारिस्थितिक और सामाजिक संदर्भ में गहरी प्रासंगिकता रखती है।
उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचे के उल्लेखनीय विकास पर भी प्रकाश डाला, जिसमें व्यापक सड़क, रेल, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी शामिल है, जिसने सुदूरवर्ती जिलों को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा है। उन्होंने नवा रायपुर की भारत के पहले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में प्रशंसा की, जो आईटी हब, फार्मा हब, एआई डेटा सेंटर पार्क और उन्नत स्वास्थ्य सेवा के लिए एक विश्वस्तरीय मेडिसिटी जैसी नई-पुरानी पहलों के माध्यम से एक वैश्विक क्षमता केंद्र बनने के लिए तैयार है।
भविष्य की ओर: अंजोर विज़न @2047
उपराष्ट्रपति ने “अंजोर विज़न @2047” के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के प्रयासों को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजिटल शासन सुधारों सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना है। यह विज़न आर्थिक विस्तार, मानव विकास और स्थायी शासन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो विकसित भारत की राष्ट्रीय कल्पना के अनुरूप है।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्यों जैसे पंथी और कर्मा, और इसकी समृद्ध आदिवासी कलाओं और शिल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विविधता में एकता की भारतीय भावना का प्रतीक है, जहाँ सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिकीकरण साथ-साथ चलते हैं।
प्रगति का पैमाना
वास्तविक प्रगति पर ज़ोर देते हुए, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि “प्रगति केवल सकल घरेलू उत्पाद से नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर मुस्कान, शासन में उनके विश्वास और हर बच्चे की आँखों में चमकती आशा से भी मापी जाती है।”
अपने संबोधन के समापन पर, उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकियों और वैश्विक बाज़ारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें साहस, रचनात्मकता और करुणा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि रजत महोत्सव को केवल अतीत के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रतिज्ञा के रूप में देखा जाना चाहिए—एक विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से एक विकसित भारत के निर्माण, लोकतंत्र को मजबूत करने, संस्कृति का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उज्जवल कल छोड़ने की प्रतिज्ञा।
समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमन डेका; मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय; छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
















