छत्तीसगढ़

लाल आतंक पर पुलिस का प्रहार : 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य

दंतेवाड़ा। नक्सलवाद के खिलाफ जारी जंग में वर्ष 2025 सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि वाला साल रहा है। पुलिस की रणनीतियों और पुनर्वास नीतियों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष न केवल आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या बढ़ी है, बल्कि अब बड़े पदों पर सक्रिय कैडर भी हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

2025 की मुख्य सफलताएं: आंकड़ों की नज़र से

इस वर्ष सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की कमर तोड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्य उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

रिकॉर्ड आत्मसमर्पण: कुल 272 नक्सलियों ने हथियार डाले। खास बात यह है कि इन पर कुल 2.97 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह 2024 की तुलना में एक बड़ी छलांग है, जब 234 नक्सलियों (90 लाख का इनाम) ने सरेंडर किया था।

सख्त कार्रवाई: मुठभेड़ों में 4 कट्टर नक्सली मारे गए और 35 को गिरफ्तार किया गया, जिन पर 17 लाख रुपये का सामूहिक इनाम था।

शीर्ष नेतृत्व को झटका: ऑपरेशन ‘ब्लैकफॉरेस्ट’ जैसे संयुक्त अभियानों के माध्यम से प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के बसवराजू और गौतम जैसे बड़े चेहरों को निष्क्रिय करने में सफलता मिली।

पुनर्वास और सुधार की नई पहल

सरकार केवल हथियारों को शांत नहीं कर रही, बल्कि आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ रही है। सरेंडर करने वाले पूर्व नक्सलियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जा रही हैं:

बैंक खाते खुलवाना और राशन कार्ड जारी करना।

कौशल विकास के जरिए रोजगार प्रशिक्षण।

परिवहन के लिए बस पास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ।

अपराधों में कमी और कानून व्यवस्था

बेहतर पुलिसिंग का असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ा है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होने से अपराध के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है:

गंभीर अपराधों में लगभग 7% की कमी आई है।

चोरी की घटनाओं में 14% और अन्य अपराधों में 8.8% की गिरावट देखी गई।

साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए, देश के विभिन्न राज्यों से 24 आरोपियों को पकड़ा गया।

2026 का रोडमैप: क्या है अगला लक्ष्य?

प्रशासन ने भविष्य के लिए स्पष्ट और कड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

मार्च 2026 तक सशस्त्र माओवाद का पूरी तरह सफाया करना।

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान।

साइबर सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता और DIAL 112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाना।

उत्कृष्ट सेवा के लिए जवानों को ‘प्रधानमंत्री पुलिस पदक’ और ‘छत्तीसगढ़ शौर्य पदक’ जैसे सम्मानों से नवाजा गया है, जिससे बल का मनोबल ऊंचा है।

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