विधायक बालेश्वर साहू की गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत : चरणदास महंत ने सरकार पर साधा निशाना

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जैजैपुर से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। किसान से धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में हुई इस कार्रवाई को विपक्ष ने ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सोशल मीडिया के माध्यम से सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब एक दशक पुराना है। पुलिस जांच के अनुसार, मामला साल 2015 से 2020 के बीच का है जब बालेश्वर साहू बम्हनीडीह स्थित सहकारी बैंक में प्रबंधक (मैनेजर) के तौर पर कार्यरत थे।
आरोप: उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर राजकुमार शर्मा नामक किसान के नाम पर फर्जी ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) दस्तावेज तैयार किए।
राशि: इस जालसाजी के जरिए कथित तौर पर लगभग 42.78 लाख रुपये का लोन निकाला गया।
न्यायिक कार्रवाई: पुलिस द्वारा चार्जशीट पेश किए जाने के बाद, सीजेएम कोर्ट ने विधायक की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 22 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
‘सत्ता का दुरुपयोग’ बनाम ‘जीरो टॉलरेंस’
विधायक की गिरफ्तारी पर प्रदेश के दो बड़े दिग्गजों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है:
डॉ. चरणदास महंत (नेता प्रतिपक्ष): महंत ने भाजपा सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी विपक्षी विधायकों को डराने और उनकी छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बालेश्वर साहू ने इन आरोपों को पहले ही निराधार बताया था और पूरी कांग्रेस पार्टी कानूनी लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।
विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री): दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है। उन्होंने दोहराया कि कानून की नजर में हर व्यक्ति समान है और गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
विधायक बालेश्वर साहू वर्तमान में जिला जेल में बंद हैं।
कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि भाजपा इसे निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया।
मामला बैंक मैनेजर रहते हुए फर्जी लोन निकालने से जुड़ा है।
















