साल 2025 में कीमती धातुओं की चमक रही बरकरार, क्या 2026 में भी जारी रहेगा मुनाफे का सफर?

नई दिल्ली (एजेंसी)। निवेश के नजरिए से पिछला साल (2025) काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहां सोने और चांदी ने निवेशकों की झोली खुशियों से भर दी, वहीं शेयर बाजार का प्रदर्शन औसत रहा। भारतीय रुपये में आई गिरावट ने जरूर चिंता पैदा की, लेकिन अब नए साल की शुरुआत के साथ ही निवेशकों की निगाहें एक बार फिर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी पर टिकी हुई हैं।
चांदी: मांग और आपूर्ति के अंतर से आई ऐतिहासिक तेजी
चांदी के लिए साल 2025 किसी वरदान से कम नहीं रहा। 1 जनवरी को जो चांदी ₹90,500 प्रति किलो थी, वह साल के अंत तक ₹1,24,000 के रिकॉर्ड स्तर को छू गई।
रिटर्न: चांदी ने निवेशकों को सालभर में करीब 170% की भारी बढ़त दिखाई है।
कारण: औद्योगिक मांग में निरंतर वृद्धि और वैश्विक स्तर पर घटती सप्लाई ने इसकी कीमतों को हवा दी है।
भविष्यवाणी: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में चांदी ₹3 लाख का आंकड़ा पार कर सकती है।
सोना: 50 सालों का रिकॉर्ड टूटा
सोने ने इस साल रिटर्न के मामले में पिछले 5 दशकों के कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं। 2024 के अंत में जो सोना ₹78,950 पर था, वह 2025 के अंत तक ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया।
मुनाफा: सोने ने एक साल में लगभग 80% का रिटर्न दिया है।
संभावना: अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए सोना अगले साल $5,000 प्रति औंस तक जा सकता है, जिससे भारतीय बाजारों में इसकी कीमत ₹1.60 लाख तक पहुँचने की उम्मीद है।
शेयर बाजार: वैश्विक दबाव के बीच धीमी रही रफ्तार
भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) के लिए पिछला साल चुनौतीपूर्ण रहा। अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक उथल-पुथल का असर यहां भी दिखा:
सेंसेक्स: सालभर में इसमें करीब 7,000 अंकों की बढ़त दर्ज की गई, जो लगभग 9% का रिटर्न है।
निफ्टी: निफ्टी ने 10.5% की वृद्धि के साथ निवेशकों की संपत्ति में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये का इजाफा किया।
विशेषज्ञ राय: यदि नए साल में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते सकारात्मक रहते हैं, तो शेयर बाजार में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
रुपया: डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट
रुपये के लिए साल 2025 काफी कमजोर साबित हुआ। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा करीब 5% टूटकर ₹91 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गई। केवल डॉलर ही नहीं, बल्कि पाउंड (14%) और यूरो (19%) के मुकाबले भी रुपये की साख में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
















