छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की तैयारी : विजय शर्मा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए एक निर्णायक समय-सीमा तय कर दी है। जगदलपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा। उन्होंने इसे केवल एक सैन्य जीत नहीं, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक पुनरुद्धार का नया अध्याय बताया।

इस महत्वपूर्ण घोषणा के दौरान मंत्री केदार कश्यप, विधायक किरण सिंहदेव और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों समेत केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ रणनीतिकार भी मौजूद थे।

रणनीति और सफलता के प्रमुख आंकड़े

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित रोडमैप पर चलते हुए राज्य सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ चौतरफा घेराबंदी की है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े इसकी सफलता की तस्दीक करते हैं:

आत्मसमर्पण: 3,000 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा को चुना।

गिरफ्तारी: 2,000 से ज्यादा कैडर पुलिस की गिरफ्त में आए।

मुठभेड़: लगभग 500 नक्सली अभियानों के दौरान ढेर हुए।

नेतृत्व का पतन: बड़े नक्सली नेता जैसे ‘पापा राव’ का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि अब संगठन का शीर्ष ढांचा ढह चुका है।

“आज स्थिति यह है कि प्रदेश में डीकेजेडसी (DKZC) स्तर का कोई बड़ा माओवादी नेता सक्रिय नहीं बचा है। अब केवल 30 से 40 की संख्या में नक्सली सुदूर इलाकों में सिमट कर रह गए हैं।” – विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री

सुरक्षा कैंप अब बनेंगे ‘विकास केंद्र’

सरकार की योजना केवल बंदूक के दम पर शांति लाने की नहीं है। उपमुख्यमंत्री ने एक दूरदर्शी योजना साझा करते हुए कहा कि बस्तर के अंदरूनी इलाकों में तैनात 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में बदला जाएगा।

इन कैंपों की जगह अब स्कूल, अस्पताल और थाने लेंगे।

यहाँ लघु वनोपज संग्रहण और प्रोसेसिंग सेंटर खोले जाएंगे ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।

सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव

नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों के जरिए युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने स्थानीय समुदायों (मुरिया, मारिया, गोंड, हलबा) और मीडिया जगत के सहयोग की भी सराहना की, जिन्होंने इस बदलाव में सेतु का काम किया है।

वर्तमान में कबीरधाम, राजनांदगांव और धमतरी जैसे जिले लगभग मुक्त हो चुके हैं और बस्तर का 95% हिस्सा अब सुरक्षित क्षेत्र की श्रेणी में आता है।

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