सिंधी भाषा व संस्कृति का संरक्षण : राज्यपाल रमेन डेका ने किया भाषा भवन का शिलान्यास

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में ‘संत शदाराम साहिब भाषा भवन’ की आधारशिला रखी। इस गरिमामयी समारोह के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के नवाचार एवं इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा आयोजित ‘आइडियाथॉन’ का भी औपचारिक शुभारंभ किया।
मातृभाषा: भावनाओं की अभिव्यक्ति का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी संवेदनाओं, सुख और दुख को व्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपनी भाषा से हमारा एक गहरा भावनात्मक लगाव होता है, जो अपरिचित स्थानों पर भी समान भाषा बोलने वालों के बीच अपनत्व का भाव पैदा कर देता है।
संस्कृत और भारतीय भाषाओं की एकता
भारत की भाषाई विविधता को देश की शक्ति बताते हुए राज्यपाल ने कहा:
सांस्कृतिक एकता: विविधता के बावजूद भारत एकता के सूत्र में पिरोया हुआ है।
संस्कृत का प्रभाव: हमारी प्राचीन भाषा संस्कृत का प्रभाव हिंदी, तमिल, बंगाली और असमिया जैसी लगभग सभी भारतीय भाषाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
विरासत का संरक्षण: भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत करने में इनका योगदान अतुलनीय है।
सिंधी समाज और भाषा संवर्धन
राज्यपाल ने सिंधी समुदाय की उद्यमशीलता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका के बाद भी इस समाज ने अपनी मेहनत से न केवल समृद्धि हासिल की, बल्कि देश के हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
“यह अत्यंत सराहनीय है कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में सिंधी भाषा के डिप्लोमा और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। अपनी भाषा को बढ़ावा देने के साथ-साथ हमें उस प्रदेश की स्थानीय भाषा और संस्कृति का भी सम्मान करना चाहिए जहाँ हम निवास करते हैं, ताकि सामाजिक समरसता बनी रहे।”
भविष्य की पीढ़ी और आधुनिक तकनीक
उन्होंने भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल के अनुसार, यदि हम अपनी भाषाओं को तकनीक के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम बनाते हैं, तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों तक अपना ज्ञान, इतिहास और कला-संस्कृति आसानी से पहुँचा सकेंगे।
समारोह में प्रमुख उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर शदाणी दरबार के पीठाधीश संत युधीष्ठीर लाल महाराज, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी, विधायक पुरंदर मिश्रा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला एवं अन्य गणमान्य नागरिक व छात्र उपस्थित थे।
















