जन-संवाद और तत्काल न्याय : जब मुख्यमंत्री ने निभाया ‘विष्णु भैया’ का फर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संवेदनशील सुशासन की एक नई परिभाषा देखने को मिल रही है। हाल ही में चंदखुरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसने न केवल वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सरकार और आम जनता के बीच की दूरियां अब खत्म हो रही हैं।
सुरक्षा घेरा तोड़कर सुनी फरियाद
चंदखुरी के रहने वाले चंदूलाल वर्मा शारीरिक चुनौतियों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उनकी अंतिम उम्मीद मुख्यमंत्री से मिलने में थी, इसलिए वे कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण समारोह में पहुंचे। सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण जब उन्हें मंच तक जाने से रोका गया, तो वे निराश हो गए। लेकिन मुख्यमंत्री श्री साय की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मियों को निर्देश देकर उन्हें मंच पर सादर आमंत्रित किया।
मजदूरी से लाचारी तक का सफर
चंदूलाल कभी राजमिस्त्री के रूप में मेहनत कर अपना घर चलाते थे। लेकिन किस्मत ने तब करवट ली जब शुगर (मधुमेह) और ‘डायबिटिक फुट’ की गंभीर बीमारी ने उन्हें चलने-फिरने से लाचार कर दिया। मंच पर मुख्यमंत्री के सामने उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई कि किस तरह काम छूटने के बाद अब उन्हें एक बैटरी चलित ट्राईसिकल की सख्त जरूरत है ताकि वे फिर से आत्मनिर्भर बन सकें।
मिनटों में फैसला, चंद घंटों में समाधान
मुख्यमंत्री ने न केवल चंदूलाल की बातों को ध्यान से सुना, बल्कि तत्काल सहायता राशि स्वीकृत की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि बिना किसी देरी के पीड़ित को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराई जाए।
त्वरित कार्यवाही का असर:
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ।
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्परता दिखाते हुए कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं।
कुछ ही समय में चंदूलाल को उनकी नई ट्राईसिकल सौंप दी गई।
“मैने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री जी खुद मुझे मंच पर बुलाएंगे और इतनी जल्दी मेरी समस्या दूर कर देंगे। विष्णु भैया का यह उपकार मैं कभी नहीं भूलूंगा।”
— चंदूलाल वर्मा (भावुक होते हुए)
सुशासन का बढ़ता कदम
यह घटना दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री का यह मानवीय दृष्टिकोण स्पष्ट संदेश देता है कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।
















