छत्तीसगढ़ में विकास की नई रफ्तार : पीएम आवास निर्माण में बना देश का नंबर-1 राज्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण विकास और आवास योजना के क्रियान्वयन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उपमुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने हाल ही में नवा रायपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बताया कि छत्तीसगढ़ वर्तमान में देश का ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ प्रतिदिन सर्वाधिक प्रधानमंत्री आवास (PM Awas) बनाए जा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने सरकार की पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आवास और सशक्तिकरण: ‘मोर आवास, मोर अधिकार’
राज्य सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए थे, जिनका काम अब युद्ध स्तर पर जारी है। इस अभियान की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
विशेष लाभ: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 3,000 परिवारों और विशेष पिछड़ी जनजातियों (PM-JANMAN) के 33,000 से अधिक लोगों को आवास की स्वीकृति दी गई है।
लखपति दीदी और उद्यमिता: आवास निर्माण में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘डीलर दीदी’ और ‘राजमिस्त्री’ के रूप में अपनी पहचान बनाई है। लगभग 8,000 महिलाएं निर्माण सामग्री की आपूर्ति कर रही हैं।
नवाचार: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के लिए 5,000 से अधिक राजमिस्त्रियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
डिजिटल क्रांति और बैंकिंग सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक लेनदेन को सुगम बनाने के लिए सरकार ने अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ किए हैं।
प्रदेश में 6,195 केंद्रों के माध्यम से अब तक ₹919 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन हो चुका है।
धमतरी जिले का सांकरा देश का पहला ऐसा ग्राम पंचायत बना है, जहाँ करों का भुगतान UPI के माध्यम से किया जा रहा है। अब ‘रायपुर मॉडल’ की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।
बुनियादी ढांचा: बस्तर की अधूरी सड़कें हुईं पूर्ण
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है:
ऐतिहासिक उपलब्धि: बस्तर के दुर्गम इलाकों में 41 महत्वपूर्ण सड़कें, जो वर्षों से लंबित थीं, अब पूरी हो चुकी हैं। इसमें सुकमा की ताड़मेटला और दंतेवाड़ा की 20 साल पुरानी सड़कें शामिल हैं।
प्लास्टिक रोड: महासमुंद में ‘स्वच्छताग्राही दीदियों’ द्वारा एकत्र किए गए वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग कर पर्यावरण अनुकूल सड़कों का निर्माण किया गया है।
आधुनिक निगरानी: पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में बनने वाली 2,500 किमी सड़कों की निगरानी अब ISRO और जियो इमेजिंग के जरिए सीधे मुख्यालय से की जाएगी।
सामाजिक और आर्थिक नवाचार
महतारी सदन: महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 368 ‘महतारी सदन’ बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 137 तैयार हो चुके हैं।
छत्तीसकला ब्रांड: समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘छत्तीसकला’ ब्रांड लॉन्च किया गया है।
मनरेगा में पारदर्शिता: भ्रष्टाचार रोकने के लिए ग्राम पंचायतों में QR कोड लगाए गए हैं, जिसे स्कैन कर कोई भी व्यक्ति विकास कार्यों की जानकारी ले सकता है।
जल संरक्षण: ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत जनभागीदारी से 2.32 लाख जल संरक्षण कार्य किए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण सचिवालयों को पुनः प्रारंभ कर ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना सरकार की प्राथमिकता है।
















