छत्तीसगढ़

ओबीसी क्षेत्रों का कायाकल्प : मुख्यमंत्री साय ने दिए विकास कार्यों को गति देने के निर्देश

दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में विकास की रूपरेखा जनता की जरूरतों और उनकी आकांक्षाओं के आधार पर तय की जाएगी। दुर्ग जिला मुख्यालय में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण’ की पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने पिछड़ा वर्ग बाहुल्य क्षेत्रों के सर्वांगीण उत्थान के लिए चल रही परियोजनाओं की गहन समीक्षा की।

बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक का केंद्र बिंदु पिछड़ा वर्ग का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण रहा। बैठक की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:

बजट का कुशल प्रबंधन: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवंटित बजट का पूर्ण और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

अधूरे कार्यों के लिए समय-सीमा: वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच स्वीकृत ऐसे कार्य जो अब तक शुरू नहीं हुए हैं या निर्माणाधीन हैं, उन्हें अगले दो माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

क्षेत्रीय विस्तार: वर्तमान में इस प्राधिकरण के दायरे में राज्य के 35 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहाँ बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवाएँ और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है।

शिक्षा पर विशेष जोर: पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए शैक्षणिक सुविधाओं और छात्रावासों की गुणवत्ता में सुधार लाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और स्थानीय विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस प्राधिकरण का मूल उद्देश्य विकास कार्यों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है। स्थानीय नेतृत्व के परामर्श से छोटी-छोटी निर्माण योजनाओं को तुरंत स्वीकृति दी जा रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों से सीधा संवाद किया और उन्हें कार्यों की प्रगति की निरंतर निगरानी (Monitoring) करने की जिम्मेदारी सौंपी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, टंकराम वर्मा, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, गुरु खुशवंत साहेब, गजेन्द्र यादव सहित सांसद बृजमोहन अग्रवाल और प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ललित चंद्राकर मौजूद थे। साथ ही शासन के वरिष्ठ सचिव, कमिश्नर और आईजी स्तर के अधिकारी भी चर्चा में शामिल हुए।

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