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गोल्ड लोन का बढ़ता क्रेज : दो वर्षों में दोगुना हुआ कर्ज का आंकड़ा

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम अब केवल निवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक सबसे भरोसेमंद जरिया बन गया है। क्रिफ हाई मार्क की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों में गोल्ड लोन (सोने के बदले ऋण) लेने की प्रवृत्ति में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे यह पोर्टफोलियो नवंबर 2025 तक 15.6 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेजी से बढ़ते आंकड़ों पर एक नजर

गोल्ड लोन बाजार की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह सेक्टर पिछले दो सालों में लगभग 100% बढ़ा है:

वार्षिक वृद्धि: नवंबर 2025 तक खत्म हुए एक साल में इसमें 42% की वृद्धि देखी गई, जबकि इससे पिछले साल यह आंकड़ा 39% था।

कुल पोर्टफोलियो: नवंबर 2023 में जहाँ यह 7.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

रिटेल लोन में हिस्सेदारी: कुल खुदरा ऋणों में गोल्ड लोन की भागीदारी 8.1% से बढ़कर अब 9.7% हो गई है।

क्यों बढ़ रही है गोल्ड लोन की लोकप्रियता?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उछाल के पीछे मुख्य कारण सोने की आसमान छूती कीमतें हैं। जब सोने के दाम बढ़ते हैं, तो गिरवी रखे गए सोने की वैल्यू भी बढ़ जाती है, जिससे ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक लोन राशि (LTV – Loan to Value) मिल पाती है। इसके अलावा, सुरक्षित गारंटी होने के कारण बैंक और वित्तीय संस्थान भी इसे देने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।

बाजार पर किसका कब्जा?

गोल्ड लोन के क्षेत्र में सरकारी बैंकों का दबदबा बरकरार है, जिनकी बाजार में हिस्सेदारी लगभग 60% है। वहीं, गोल्ड लोन देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) भी 8.1% हिस्सेदारी के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।

उधारकर्ताओं का व्यवहार: दिलचस्प तथ्य

रिपोर्ट में कर्ज लेने वालों के व्यवहार को लेकर कुछ रोचक आंकड़े सामने आए हैं:

बड़े लोन की डिमांड: अब लोग छोटे लोन के बजाय बड़े अमाउंट को तरजीह दे रहे हैं। 2.5 लाख रुपये से अधिक के कर्ज अब कुल पोर्टफोलियो का लगभग आधा हिस्सा हैं।

पुरुष बनाम महिला: लोन लेने वालों में 56% से अधिक संख्या पुरुषों की है।

पुनर्भुगतान (Repayment): हालांकि पुरुष लोन लेने में आगे हैं, लेकिन समय पर कर्ज चुकाने और बेहतर वित्तीय अनुशासन के मामले में महिलाएं पुरुषों से कहीं बेहतर साबित हुई हैं।

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