खर्राटे : केवल एक शोर नहीं, गंभीर बीमारी का संकेत

नींद में आने वाली आवाजों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी
हेल्थ न्युज (एजेंसी)। अक्सर घरों में खर्राटों को एक मजाकिया विषय माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि में यह एक गंभीर चेतावनी हो सकती है। विशेषज्ञ अब ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे लेने की आदत को हल्के में न लेने की सलाह दे रहे हैं। जो आवाज़ आपके साथी की नींद खराब कर रही है, वह असल में आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बड़ी समस्या का लक्षण हो सकती है।
खर्राटों के प्रकार और जोखिम
चिकित्सीय आधार पर खर्राटों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
सामान्य खर्राटे: इसमें व्यक्ति एक लयबद्ध और स्थिर आवाज़ में खर्राटे लेता है। विशेषज्ञ इसे लेकर तुलनात्मक रूप से कम चिंतित होते हैं।
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (OSA): यह सबसे खतरनाक श्रेणी है, जिससे खर्राटे लेने वाले करीब 75% लोग प्रभावित होते हैं। इसमें खर्राटों की आवाज़ धीरे-धीरे तेज़ होती है और फिर अचानक कुछ सेकंड के लिए सांस रुक जाती है। ऐसा श्वसन नली में रुकावट के कारण होता है।
इन लक्षणों पर दें ध्यान
दुनिया भर में लगभग 1 अरब लोग ‘स्लीप एप्निया’ से जूझ रहे हैं। यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को महसूस करते हैं, तो आपको सावधान होने की ज़रूरत है:
सोकर उठने के बाद भी ताजगी महसूस न होना और दिन भर थकान रहना।
दिन के समय बार-बार झपकी आना।
सोते समय 10 सेकंड या उससे अधिक समय के लिए सांस का अटकना।
तेज़ आवाज़ के साथ अचानक सांस लेने की कोशिश करना।
स्वास्थ्य पर प्रभाव और जांच
स्लीप एप्निया के कारण मस्तिष्क तक पहुँचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह (डायबिटीज) और मोटापे जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है।
इसकी जांच अब बहुत आसान हो गई है। आप अपने प्राथमिक चिकित्सक या चेस्ट फिजिशियन की सलाह पर ‘स्लीप टेस्ट’ करवा सकते हैं। आजकल पोर्टेबल डिवाइस की मदद से यह टेस्ट घर पर ही रात भर सोते समय किया जा सकता है, जो काफी सुविधाजनक और किफायती है।
उपचार ही बचाव है
वर्तमान में ‘कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर’ (CPAP) थेरेपी को स्लीप एप्निया के इलाज के लिए सबसे प्रभावी और मानक तरीका माना जाता है। यदि आपको या आपके किसी परिचित को यह समस्या है, तो विशेषज्ञों से परामर्श लेने में देरी न करें।
















