अकेलेपन की कीमत: मानसिक तनाव ही नहीं, संक्रमण और बीमारियों का भी बढ़ सकता है खतरा

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। अक्सर लोग सुकून की तलाश में अकेले रहना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा सामाजिक दूरी आपके शरीर को अंदरूनी रूप से बीमार कर सकती है? हाल ही में हुए एक शोध ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अकेलापन न केवल आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह शरीर में संक्रमण (Infection) और अन्य गंभीर बीमारियों का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है।
क्या कहता है शोध?
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके) और फुडन यूनिवर्सिटी (चीन) के वैज्ञानिकों ने यूके बायोबैंक के लगभग 42,000 वयस्कों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। शोध में यह बात सामने आई कि जो लोग समाज से कटे हुए रहते हैं, उनके रक्त में विशेष प्रकार के प्रोटीन का स्तर बदल जाता है। ये प्रोटीन शरीर में सूजन (inflammation), तनाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
अकेलापन और सामाजिक दूरी: अंतर समझना ज़रूरी
अध्ययन में ‘अकेलेपन’ (मनोवैज्ञानिक भावना) और ‘सामाजिक अलगाव’ (लोगों से कम मिलना-जुलना) के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है:
सामाजिक अलगाव: इसमें शोधकर्ताओं ने 175 प्रोटीनों की पहचान की।
अकेलापन: इससे जुड़े 26 प्रोटीन पाए गए।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से 85% प्रोटीन दोनों स्थितियों में समान थे, जो सीधे तौर पर मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोगों से जुड़े हुए हैं।
शरीर पर प्रभाव डालने वाले मुख्य प्रोटीन
प्रोटीन,शरीर पर प्रभाव
ADM (एडीएम),यह तनाव और ‘लव हार्मोन’ (ऑक्सीटोसिन) को नियंत्रित करता है। इसका बढ़ा हुआ स्तर असामयिक मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकता है।
ASGR1,यह हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है।
अन्य प्रोटीन,”इंसुलिन रेजिस्टेंस, धमनियों को नुकसान और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों से भी इनका संबंध पाया गया है।”
सुरक्षित रहने के उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए सामाजिक मेलजोल उतना ही ज़रूरी है जितना कि संतुलित आहार।
सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लें: अपने आस-पास के आयोजनों या क्लबों से जुड़ें।
अपनों के संपर्क में रहें: परिवार और दोस्तों के साथ नियमित बातचीत मानसिक और शारीरिक मजबूती देती है।
सक्रिय जीवनशैली: सामाजिक रूप से सक्रिय रहने से ‘स्ट्रेस रेगुलेशन’ बेहतर होता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
















