खाकी का मानवीय चेहरा, आग से झुलसी महिला के लिए देवदूत बने STF जवान

दंतेवाड़ा। बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबल न केवल मोर्चे पर लोहा ले रहे हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीणों के लिए जीवनदाता भी बन रहे हैं। ताजा मामला पुरंगेल गांव का है, जहाँ STF (स्पेशल टास्क फोर्स) के जवानों ने गंभीर रूप से झुलसी एक महिला को रेस्क्यू कर नई मिसाल कायम की है।
समय पर मिली मदद, टला बड़ा हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, बीजापुर और दंतेवाड़ा की सरहद पर स्थित घने जंगलों में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान जवानों को सूचना मिली कि पुरंगेल गांव में एक महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। महिला करीब दो हफ्ते पहले आग की चपेट में आने से बुरी तरह जल गई थी। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और अंदरूनी इलाका होने के कारण उसे इलाज नहीं मिल पा रहा था, जिससे उसके घाव गहरे हो गए थे।
कंधे पर चारपाई और मीलों का सफर
महिला की नाजुक हालत को देखते हुए कंपनी कमांडर ओम प्रकाश सेन और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए उसे अस्पताल पहुँचाने का निर्णय लिया। इलाके की भौगोलिक स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि वहां वाहन पहुंचना मुमकिन नहीं था। ऐसे में:
जवानों ने एक चारपाई को ‘कांवड़’ की तरह तैयार किया।
महिला को उस पर लिटाकर ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पहाड़ियों के बीच कई किलोमीटर तक पैदल चले।
जवानों ने उसे सुरक्षित हिरोली गांव पहुँचाया, जहाँ से एम्बुलेंस के जरिए उसे पहले किरंदुल और फिर दंतेवाड़ा जिला अस्पताल भेजा गया।
ममता का भी रखा ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक, महिला का शरीर लगभग 50% तक झुलस चुका था। इलाज के साथ-साथ जवानों ने महिला के तीन महीने के दुधमुंहे बच्चे की देखभाल के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए। जवानों की इस तत्परता की बदौलत अब महिला का उपचार सुचारू रूप से चल रहा है।
“सुरक्षाबलों का काम केवल सुरक्षा देना ही नहीं, बल्कि संकट में फंसे नागरिकों का साथ देना भी है। जवानों की इस संवेदनशीलता ने ग्रामीणों और पुलिस के बीच भरोसे को और मजबूत किया है।” – स्थानीय प्रशासन
















