छत्तीसगढ़

साहित्य उत्सव में छाया ‘जशप्योर’ का जादू : महुआ और मिलेट्स के व्यंजनों ने जीता सबका दिल

रायपुर। रायपुर में आयोजित साहित्य उत्सव इन दिनों केवल चर्चाओं और विमर्श का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण उद्यमिता की सफलता का गवाह भी बन रहा है। यहाँ जशपुर के स्थानीय ब्रांड ‘जशप्योर’ (Jashpure) ने अपने अनूठे उत्पादों से आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच के अनुरूप, यह ब्रांड आदिवासी संस्कृति और महिला सशक्तिकरण को आधुनिक बाजार से जोड़ने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।

महुआ: अब सिर्फ नशा नहीं, एक ‘सुपरफूड’

उत्सव में महुआ से बने नवाचारी उत्पादों—जैसे लड्डू, कुकीज़ और कैंडी—ने लोगों का ध्यान विशेष रूप से अपनी ओर खींचा। आमतौर पर महुआ को केवल शराब से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन जशप्योर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।

युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन के अनुसार, जशपुर की महिलाएं अब महुए को फूड-ग्रेड मानक पर तैयार कर रही हैं, जिससे इसके पोषण मूल्य को एक ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचान मिल रही है। स्टॉल पर लोग न केवल स्वाद ले रहे हैं, बल्कि QR कोड के जरिए इन उत्पादों की शुद्धता और निर्माण प्रक्रिया की बारीकियां भी समझ रहे हैं।

उत्पादों की विविधता और गुणवत्ता

जशप्योर के पास आज 90 से अधिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला है। महुआ के अलावा यहाँ मिलेट्स (श्रीअन्न) का भी बोलबाला रहा:

ग्लूटेन-फ्री विकल्प: रागी, कुटकी और कोदो से बने बिस्कुट।

पौष्टिकता: बकव्हीट और अन्य मोटे अनाजों से तैयार स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स।

शुद्धता: स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर बनाए गए पारंपरिक व्यंजन।

स्वावलंबन की ओर बढ़ते कदम

जशप्योर ब्रांड आज छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी का पर्याय बन चुका है। यह पहल साबित करती है कि यदि पारंपरिक ज्ञान को सही दिशा और आधुनिक तकनीक का साथ मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। रायपुर के इस साहित्यिक मंच पर जशप्योर की चमक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और स्वदेशी उत्पाद अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं।

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