छत्तीसगढ़ की नदियों का बदलेगा स्वरूप : प्रदूषण मुक्त होंगी महानदी से केलो तक की जीवनधाराएँ

रायपुर। छत्तीसगढ़ की नदियों की सेहत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने हाल ही में संसद में प्रदेश की प्रमुख नदियों—महानदी, शिवनाथ, खारून, अर्पा, हसदेव और केलो—को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।
यह जानकारी सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा नदियों के कायाकल्प में हो रही देरी और बढ़ते प्रदूषण पर उठाए गए सवालों के जवाब में दी गई।
सांसद ने जताई चिंता: “पुरखों की विरासत नहीं, बच्चों का कर्ज है प्रकृति”
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में खारून और अन्य नदियों में गिरते गंदे पानी (सीवेज) और औद्योगिक कचरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से पूछा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मानकों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर क्या कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा:
“महानदी और खारून जैसी नदियां छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा हैं। हमें इनके संरक्षण में देरी बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए। हमें यह याद रखना होगा कि यह धरती हमें पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली, बल्कि हमने इसे अपनी आने वाली पीढ़ी से उधार लिया है।”
प्रदूषण रोकने के लिए सरकार का ‘ब्लूप्रिंट’
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए दोहरे स्तर पर काम किया जा रहा है:
- सीवेज ट्रीटमेंट का विस्तार:
जहाँ अभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माणाधीन हैं, वहां अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मल-गाद शोधन संयंत्र (FSTP) लगाए गए हैं ताकि बिना उपचार के कचरा नदियों में न बहे।
प्रदेश के 16 महत्वपूर्ण स्थानों पर एसटीपी निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
- उद्योगों पर सख्त निगरानी:
रियल-टाइम मॉनिटरिंग: 17 सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक श्रेणियों के लिए ‘ऑनलाइन सतत बहिस्त्राव निगरानी प्रणाली’ (OCEMS) अनिवार्य कर दी गई है।
कानूनी कार्रवाई: जल प्रदूषण अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कड़ी नजर रख रहे हैं।
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD): जल संसाधनों को बचाने के लिए उद्योगों को उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे ताजे पानी की खपत कम हो सके।
लक्ष्य,अपनाई गई तकनीक/उपाय
गंदे पानी का शोधन,STP और FSTP का नेटवर्क विस्तार
औद्योगिक निगरानी,OCEMS (ऑनलाइन रियल-टाइम ट्रैकिंग)
नियमों का पालन,NGT मानकों और पर्यावरण कानूनों की सख्ती
जल संरक्षण,उपचारित पानी का पुनर्चक्रण (Recycling)
















