बस्तर में 208 नक्सलियों के सरेंडर पर भूपेश ने जताई संतुष्टि, बोले- भाजपा ने अपनाई कांग्रेस की नक्सल नीति

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने बस्तर में 208 नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने पर राज्य शासन और सुरक्षा एजेंसियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से सुकून मिला है कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार कांग्रेस द्वारा शुरू की गई ‘विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति पर ही आगे बढ़ रही है।
भूपेश बघेल ने इस बड़ी घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “बस्तर में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह दिखाता है कि यह राष्ट्रीय संघर्ष अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। मैं सरकार और सुरक्षा बलों को इस सफलता के लिए बधाई देता हूँ।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ही पहली बार नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार की गई थी। उस दौरान नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, सड़कें बिछाई गईं और बंद पड़े शैक्षणिक संस्थान दोबारा शुरू किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती के रूप में लिया गया था।
बघेल ने यह भी कहा कि 2003 से 2018 तक रही पिछली भाजपा सरकार पर सुरक्षा सलाहकार केपीएस गिल ने भी ‘माओवाद के खिलाफ अनिच्छुक’ होने का आरोप लगाया था।
आत्मसमर्पण का विवरण:
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जगदलपुर में कुल 208 माओवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। इनमें 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल थे। आत्मसमर्पण करने वालों में रूपेश उर्फ सतीश, भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम और धन्नू वेट्टी उर्फ संटू जैसे प्रमुख माओवादी नेता भी शामिल हैं। इन नक्सलियों ने पुलिस को 19 एके-47 राइफलें और 17 एसएलआर समेत कुल 153 हथियार सौंपे हैं।
















