खूंखार नक्सली कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद का अध्याय समाप्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ी सफलता मिली है। बस्तर क्षेत्र में ढाई दशकों से सक्रिय रहे टॉप नक्सल कमांडर पापाराव ने अपने 12 साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। इस घटनाक्रम को राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में अंतिम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा बयान
राज्य के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है। शर्मा के अनुसार, अब राज्य में सक्रिय रूप से कोई बड़ा नक्सली नेतृत्व नहीं बचा है।
इनामी कमांडर: पापाराव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह पिछले 25 वर्षों से बस्तर के जंगलों में सक्रिय था और कई सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में शामिल रहा।
आत्मसमर्पण की तैयारी: पापाराव और उसके 12 साथी अत्याधुनिक हथियारों (जैसे AK-47) के साथ बीजापुर में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्हें आगे की कार्यवाही के लिए जगदलपुर ले जाया जाएगा।
पुनर्वास पर जोर: गृह मंत्री ने बताया कि उनकी पापाराव से बातचीत हुई है और अब उसकी विचारधारा बदल चुकी है। सरकार उसे मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पुनर्वास नीति के तहत मदद कर रही है।
नक्सलियों की वर्तमान स्थिति: गृह मंत्री के अनुसार, अब छत्तीसगढ़ में विशेष क्षेत्रीय समितियों (DKSZC) के कोई भी सक्रिय सदस्य नहीं बचे हैं। हालांकि, कुछ छोटे स्तर के नक्सली अभी भी हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। सरकार ने बाकी बचे नक्सलियों के लिए भी आत्मसमर्पण की डेडलाइन तय की है।
















