छत्तीसगढ़

साहिबजादों के वीरता व बलिदान को जन जन तक पहुंचाने की आवश्यकता : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘वीर बाल दिवस’ के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेककर साहिबजादों की शहादत को भावपूर्ण नमन किया। इस दौरान उन्होंने सिख गुरुओं के अद्वितीय बलिदान और राष्ट्र रक्षा में उनके योगदान को रेखांकित किया।

इतिहास के पन्नों में वीरता की अमिट छाप

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक, सिख परंपरा का इतिहास राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए दी गई कुर्बानियों से भरा है। विशेष रूप से 10वें गुरु के छोटे साहिबजादों, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने अत्यंत कम आयु में जिस साहस का परिचय दिया, वह विश्व इतिहास में विरल है। अन्याय के सामने न झुकने के उनके संकल्प ने सत्य और आत्मसम्मान की एक नई परिभाषा लिखी।

पाठ्यक्रम में शामिल होगी शौर्य गाथा

वीर साहिबजादों के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है:

शिक्षा में समावेश: अब साहिबजादों की वीरता की कहानियों को छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

प्रारंभिक शिक्षा: कक्षा तीसरी के विद्यार्थी अब इन वीर बालकों के जीवन और उनके महान त्याग के बारे में पढ़ सकेंगे।

उद्देश्य: मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इतिहास में इन महान बलिदानियों को वह स्थान नहीं मिल पाया था जिसके वे हकदार थे। ‘वीर बाल दिवस’ के माध्यम से अब समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक उनकी वीरता का संदेश पहुँच रहा है।

प्रधानमंत्री की पहल की सराहना

श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ घोषित करने के निर्णय से देश भर में सिख वीरों की गाथाओं को एक भव्य और विराट स्वरूप मिला है। यह दिवस हमें सिखाता है कि सच्चाई और हिम्मत ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

इस गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों सहित सिख समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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