छत्तीसगढ़

अर्थव्यवस्था की मज़बूती के लिए बैंकों को MSME का सारथी बनना होगा : सांसद बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। रायपुर के सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित लोकसभा की प्राक्कलन समिति (Estimate Committee) की महत्वपूर्ण बैठक में शिरकत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सशक्त बनाने में बैंकिंग संस्थानों की भूमिका और उनकी सक्रियता रहा।

बैठक के दौरान अग्रवाल ने देश, विशेषकर छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक संभावनाओं वाले राज्यों में बैंकिंग सेवाओं की जमीनी हकीकत और उनके प्रभाव की विस्तार से समीक्षा की।

समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि MSME भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। उन्होंने बैंकों से ‘प्रो-एक्टिव’ दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:

सरल ऋण प्रक्रिया: पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए कागजी कार्रवाई और औपचारिकताओं को सरल बनाया जाए ताकि वे बिना किसी बाधा के व्यवसाय शुरू कर सकें।

नए क्षेत्रों को मान्यता: स्टार्टअप, सर्विस सेक्टर, रिसर्च आधारित उद्योगों और आधुनिक व्यवसायों को भी MSME की श्रेणी में प्रमुखता से शामिल कर वित्तीय सहायता दी जाए।

योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा और मुद्रा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक तय समय सीमा के भीतर पहुँचना अनिवार्य है।

“केवल बड़े उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, बैंकों को MSME क्षेत्र के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी। छत्तीसगढ़ और अंडमान जैसे क्षेत्रों में संसाधनों की प्रचुरता है, बस संतुलित बैंकिंग नीति की आवश्यकता है।” — बृजमोहन अग्रवाल, सांसद (रायपुर)

जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत

बैठक में क्रेडिट-टू-डिपॉजिट (CD) अनुपात पर भी गंभीर चर्चा हुई। अंडमान-निकोबार में इस अनुपात में हुई वृद्धि (लगभग 52% से 60% के करीब) की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी ऋण प्रवाह को तेज करना होगा।

स्थानीय आवश्यकताओं पर ध्यान:

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की बैंक शाखाओं को ऋण देने के मामले में अधिक निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।

व्यावसायिक सेवाओं जैसे इवेंट मैनेजमेंट, कंसल्टेंसी और प्रोफेशनल सर्विसेस के लिए PM मुद्रा योजना के तहत 20 लाख रुपये तक के गारंटी-मुक्त ऋण की प्रक्रिया को सुगम बनाया जाए।

विकसित भारत का लक्ष्य

सांसद ने अंत में स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा करने के लिए बैंकों को केवल आंकड़ों के खेल से बाहर निकलकर धरातल पर सक्रिय होना होगा। जब बैंक छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारीगरों के प्रति सहयोगी बनेंगे, तभी देश में रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

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