बस्तर की लोक-संस्कृति की मुरीद हुईं UN मेंटर किर्सी : विदाई के वक्त छलके आँसू

बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान और नैसर्गिक सुंदरता के कारण एक बार फिर वैश्विक फलक पर चमक उठा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की मेंटर और प्रसिद्ध कंसल्टेंट सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन ने अपने छह दिनों के प्रवास के दौरान बस्तर की माटी और यहाँ की परंपराओं को बहुत करीब से महसूस किया। शनिवार को अपनी यात्रा का समापन करते हुए उन्होंने कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला पंचायत CEO प्रतीक जैन से मुलाकात की और अपने अनुभवों को साझा किया।
स्थानीय परंपराओं और आतिथ्य से प्रभावित
किर्सी ने विशेष रूप से धुड़मारास के अपने भ्रमण को याद करते हुए बताया कि वहाँ की जीवनशैली और लोक-कला ने उनके हृदय को छू लिया। उन्होंने कहा:
“बस्तर की जड़ें बहुत गहरी और जीवंत हैं। यहाँ की परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे आज भी यहाँ के लोगों के दैनिक जीवन में रची-बसी हैं।”
पर्यटन की वैश्विक संभावनाओं पर चर्चा
प्रवास के दौरान उन्होंने न केवल प्राकृतिक स्थलों का आनंद लिया, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों और ग्रामीण पर्यटन के मॉडल को भी बारीकी से समझा। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
सतत पर्यटन (Sustainable Tourism): बस्तर को पर्यावरण और संस्कृति के नुकसान के बिना कैसे विकसित किया जाए।
सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय लोगों को पर्यटन से सीधे जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारना।
इंटरनेशनल ब्रांडिंग: बस्तर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट गंतव्य के रूप में स्थापित करना।
एक भावुक विदाई
छह दिनों तक बस्तर के विभिन्न अंचलों में समय बिताने के बाद, विदाई के क्षणों में किर्सी काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने इसे केवल एक आधिकारिक दौरा न मानकर एक भावनात्मक अनुभव बताया। उनके अनुसार, बस्तर मानवीय संवेदनाओं और प्रकृति का एक ऐसा संगम है जिसे दुनिया के हर यात्री को देखना चाहिए।
कलेक्टर आकाश छिकारा ने उनके सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का यह दृष्टिकोण बस्तर की लोक-कला और प्राकृतिक संपदा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
















