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अमेरिकी पासपोर्ट को झटका : टॉप 10 सूची से बाहर

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी पासपोर्ट अब वैश्विक मंच पर अपनी पुरानी चमक खो चुका है। आसान शब्दों में कहें तो इसकी वैश्विक ताकत को तगड़ा झटका लगा है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स के नए आंकड़ों के अनुसार, 20 सालों में पहली बार अमेरिकी पासपोर्ट दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट्स की सूची से बाहर हो गया है। 2014 में जो पासपोर्ट पहले स्थान पर था, वह अब फिसलकर 12वें नंबर पर आ गया है और यह मलेशिया के स्तर पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट अमेरिका की वैश्विक सॉफ्ट पावर (नरम शक्ति) में आई कमजोरी का संकेत है। इसके विपरीत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों ने पासपोर्ट शक्ति में अपनी बढ़त फिर से स्थापित कर ली है।

एशियाई देशों का दबदबा: सिंगापुर शीर्ष पर

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स के अनुसार, सिंगापुर अब दुनिया का सबसे मजबूत पासपोर्ट बन गया है, जो इसके धारकों को 193 देशों में बिना वीज़ा के यात्रा की सुविधा देता है। दूसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया (190 देश) और तीसरे पर जापान (189 देश) काबिज है। यूरोप के प्रमुख देश, जैसे जर्मनी, इटली और स्पेन भी टॉप पाँच में अपनी जगह बना चुके हैं। इस दौरान, अमेरिका का दो पायदान खिसककर 12वें स्थान पर आना वैश्विक यात्रा स्वतंत्रता (ट्रैवल फ्रीडम) की रैंकिंग में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

अमेरिका की प्रतिबंधात्मक नीति और वैश्विक प्रतिक्रिया

डेटा बताता है कि अमेरिकी नागरिकों को 180 देशों में वीज़ा-मुक्त प्रवेश मिलता है, लेकिन अमेरिका स्वयं केवल 46 देशों के नागरिकों को बिना वीज़ा के आने की अनुमति देता है। हेनली ओपननेस इंडेक्स (Henley Openness Index) में अमेरिका 77वें पायदान पर टिका हुआ है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि जैसे-जैसे अमेरिका खुद को अन्य देशों के लिए बंद कर रहा है, वैसे-वैसे बाकी दुनिया भी उसके नागरिकों के लिए अपने दरवाज़े सख्त कर रही है। ऑस्ट्रेलिया के बाद, यह स्थिति दुनिया में सबसे बड़ा ‘बदले का अंतर’ (Reciprocal Gap) पैदा कर रही है।

पासपोर्ट दौड़ में चीन की तेज़ छलांग

एक ओर जहां अमेरिका की रैंकिंग गिर रही है, वहीं चीन पासपोर्ट की शक्ति में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 2015 में 94वें स्थान पर रहा चीन, 2025 तक 64वें स्थान पर पहुँच गया है। पिछले 10 सालों में, चीन ने 37 नए देशों में वीज़ा-मुक्त पहुँच हासिल की है। अब यह 76 देशों में बिना वीज़ा के घूमने की सुविधा देता है, जो अमेरिका के 46 देशों से पूरे 30 अधिक है। हाल ही में रूस को इस सूची में शामिल करना दिखाता है कि बीजिंग अपनी ‘यात्रा कूटनीति’ को चतुराई से आगे बढ़ा रहा है, जबकि वॉशिंगटन अपनी खुली नीति को लेकर पिछड़ता नज़र आ रहा है।

अमेरिकी नागरिकों की दूसरी नागरिकता की तलाश

अमेरिकी पासपोर्ट की घटती ताकत अब अमेरिकी नागरिकों के फैसलों को भी प्रभावित कर रही है। हेनली एंड पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अमेरिकी नागरिक निवेश-आधारित आव्रजन कार्यक्रमों के लिए सबसे अधिक आवेदन कर रहे हैं। तीसरी तिमाही तक, उनके आवेदन पिछले पूरे साल की तुलना में 67 प्रतिशत ज़्यादा हो चुके हैं। यह चलन बताता है कि कई अमेरिकी नागरिक वैकल्पिक नागरिकता या स्थायी निवास (रेसिडेंसी) के माध्यम से अपनी यात्रा स्वतंत्रता को वापस पाने की होड़ में लगे हुए हैं।

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