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अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी का धमाका : 14 साल की उम्र में शतक जड़कर रचा इतिहास

स्पोर्ट न्युज (एजेंसी)। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में अपनी बल्लेबाजी से कोहराम मचा दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए खिताबी मुकाबले में वैभव ने एक ऐसी पारी खेली, जिसने न केवल भारत को मजबूत स्थिति में पहुँचाया, बल्कि रिकॉर्ड बुक के पन्ने भी पलट दिए। मात्र 14 वर्ष और 316 दिन की उम्र में शतक लगाकर वे अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में सेंचुरी जड़ने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं।

फाइनल का रोमांच और वैभव का तूफ़ान

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और सलामी बल्लेबाज एरॉन जॉर्ज जल्द ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने कप्तान आयुष के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। वैभव की पारी की शुरुआत संयमित थी, लेकिन क्रीज पर नजरें जमते ही उन्होंने अंग्रेज गेंदबाजों की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दीं।

उन्होंने मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की बौछार कर दी। सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ शतक से चूकने की कसर उन्होंने फाइनल में पूरी की। वैभव ने अपनी इस पारी में 8 चौके और 8 छक्के जड़े। विशेष बात यह रही कि उन्होंने अपना अर्धशतक मात्र 32 गेंदों में पूरा किया और उसके बाद की 50 रन की दूरी इतनी तेजी से तय की कि विपक्षी टीम बेबस नजर आई।

रिकॉर्ड्स की झड़ी: फाइनल का सबसे तेज शतक

वैभव ने इस मैच में 55 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही उन्होंने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए:

सबसे युवा शतकवीर: 2 मार्च 2011 को जन्मे वैभव अब अंडर-19 विश्व कप फाइनल के इतिहास में शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं।

फाइनल का सबसे तेज शतक: वैभव ने 55 गेंदों में शतक लगाकर राज बावा (69 गेंद, 2022) का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब वे अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए हैं।

विश्व रिकॉर्ड में स्थान: इस टूर्नामेंट के इतिहास में यह दूसरा सबसे तेज शतक है। इस साल ऑस्ट्रेलिया के विल मलाजचुक ने जापान के खिलाफ 51 गेंदों में शतक लगाया था, लेकिन वैभव का यह कारनामा खिताबी मुकाबले के दबाव के बीच आया है, जो इसे और भी खास बनाता है।

भारतीय क्रिकेट का भविष्य

वैभव सूर्यवंशी की यह पारी दर्शाती है कि भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी बेहद आक्रामक और निडर है। जिस उम्र में बच्चे स्कूली क्रिकेट की बारीकियां सीख रहे होते हैं, उस उम्र में वैभव ने विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक ऐसा कीर्तिमान है, जिसे आने वाले कई वर्षों तक तोड़ पाना नामुमकिन होगा।

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