पश्चिम एशिया संकट : संकट के मुहाने पर दुबई का पर्यटन, आय में 80% तक की भारी गिरावट

दुबई (एजेंसी)। पिछले वर्ष रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल करने वाला दुबई का पर्यटन उद्योग वर्तमान में ईरान युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ इस शहर ने लगभग 1.95 करोड़ अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की मेजबानी की थी, वहीं आज यहाँ के आलीशान होटल और मशहूर रेस्तरां पर्यटकों की राह देख रहे हैं। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी तनाव ने दुबई की चमक फीकी कर दी है, जिससे व्यापारियों की कमाई में 50% से 80% तक की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।
खाली पड़े रेस्तरां और ठप पड़ा कारोबार
दुबई के प्रमुख हॉस्पिटैलिटी समूहों के अनुसार, स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। ‘टाशस हॉस्पिटैलिटी ग्रुप’ की संस्थापक नताशा साइडेरिस ने बताया कि उनके आउटलेट्स में राजस्व आधा रह गया है। विशेष रूप से वे केंद्र जो पूरी तरह पर्यटकों पर निर्भर थे, वहाँ 70 से 80 प्रतिशत तक का नुकसान देखा जा रहा है। इसका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा है, जिन्हें बिना वेतन छुट्टी (Unpaid Leave) पर भेजने की नौबत आ गई है।
आंकड़ों में संकट की गंभीरता
डेटा विश्लेषण संस्थाओं और एयरडीएनए (AirDNA) के अनुसार, युद्ध की आहट के साथ ही यूएई के पर्यटन क्षेत्र को बड़ा झटका लगा:
बुकिंग रद्दीकरण: 28 फरवरी से 29 मार्च के बीच लगभग 2,26,500 शॉर्ट-टर्म स्टे बुकिंग्स रद्द की गईं।
होटल ऑक्यूपेंसी: कई इलाकों में होटलों की बुकिंग गिरकर मात्र 15-20% रह गई है।
आर्थिक क्षति: यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो पूरे मध्य पूर्व को 34 अरब डॉलर से 56 अरब डॉलर तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
प्रवासी श्रमिकों के सामने आजीविका का संकट
दुबई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासी कामगार इस मंदी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई कर्मियों का कहना है कि वर्तमान हालात उन्हें कोविड-19 के डरावने दौर की याद दिला रहे हैं। छंटनी और बिना वेतन की छुट्टियों ने इन श्रमिकों के सामने कर्ज चुकाने और घर पैसे भेजने की गंभीर समस्या खड़ी कर दी है।
विमानन क्षेत्र और गल्फ हब मॉडल पर खतरा
दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे वैश्विक ट्रांजिट पॉइंट युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों (IATA) का मानना है कि:
उड़ानों पर पाबंदी: संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 30,000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।
ईंधन की बढ़ती कीमतें: जेट फ्यूल की किल्लत और ऊंचे दामों के कारण हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी के संकेत हैं।
सुरक्षा चिंताएं: यात्रियों द्वारा रूट बदले जाने या यात्रा टालने के कारण ‘गल्फ हब मॉडल’ के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध का अंत शीघ्र नहीं हुआ, तो आने वाला ‘समर सीजन’ दुबई के पर्यटन उद्योग के लिए पूरी तरह तबाह हो सकता है।
















