छत्तीसगढ़

महिला शक्ति ने थामी परिवहन की कमान, उपमुख्यमंत्री बने यात्री

कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण की एक नई और अनूठी मिसाल कायम हुई है। जिले की महिलाओं ने उस क्षेत्र में कदम रखा है जिसे अब तक मुख्य रूप से पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता था—परिवहन व्यवसाय। इस पहल की शुरुआत तब हुई जब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने वाहन की स्टेयरिंग अपने हाथों में ली और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने एक यात्री के रूप में उनके साथ सफर किया।

ग्रामीण परिवहन को मिली नई गति

सरस मेले के दौरान उपमुख्यमंत्री ने ‘आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस’ योजना के तहत जिले के 10 महिला समूहों को मैजिक वाहन सौंपे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधाओं को बेहतर करना है।

योजना के प्रमुख बिंदु:

आर्थिक सहयोग: इन वाहनों की कीमत लगभग 7.50 लाख रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 5 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है, जबकि शेष राशि स्वयं सहायता समूहों द्वारा जुटाई गई है। इससे महिलाओं में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का भाव आएगा।

प्रशिक्षण और संचालन: इन वाहनों को चलाने के लिए महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। ये 10 वाहन जिले के 10 अलग-अलग ग्रामीण रूटों पर संचालित किए जाएंगे।

दूरस्थ क्षेत्रों में सुविधा: यह सेवा विशेष रूप से उन दुर्गम और वनांचल इलाकों के लिए वरदान साबित होगी, जहां अब तक परिवहन के साधन बहुत सीमित थे।

‘लखपति दीदी’ बनने की ओर कदम

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं की आय का एक सशक्त जरिया बनेगा। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यदि वे मेहनत और निष्ठा से इस कार्य को करेंगी, तो वे जल्द ही ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना साकार कर सकती हैं। यह प्रयास न केवल उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता देगा, बल्कि समाज में उन्हें एक नई पहचान और मान-सम्मान भी दिलाएगा।

इस पहल से न केवल ग्रामीण परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

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