डिजिटल अरेस्ट के जरिए 3 करोड़ की धोखाधड़ी : बंगाल से दबोचा गया मास्टरमाइंड

नई दिल्ली (एजेंसी)। साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मासूम लोगों को लूटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की साइबर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक ऐसे जालसाज को गिरफ्तार किया है, जिसने पटना की एक सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर को डरा-धमकाकर उनके जीवन भर की जमा पूंजी—3 करोड़ रुपये—हड़प ली थी।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
यह घटना नवंबर 2024 की है, जब पटना के कदमकुआं क्षेत्र की रहने वाली पीड़ित महिला प्रोफेसर को एक अनजान नंबर से कॉल आया। जालसाजों ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके क्रेडिट कार्ड का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग जैसी अवैध गतिविधियों में किया गया है।
महिला को पूरी तरह से डराने के लिए अपराधियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और उन्हें एक फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा। दहशत का माहौल पैदा कर ठगों ने महिला को 48 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा, यानी उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से भी बात करने से मना कर दिया गया।
3 करोड़ की लूट और एनओसी का झांसा
जांच के नाम पर ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया कि उनके बैंक खाते की राशि की जांच आरबीआई (RBI) द्वारा की जाएगी। घबराहट में आकर महिला ने अपनी तीन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाईं और कुल 3 करोड़ रुपये जालसाजों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। हद तो तब हो गई जब ठगों ने ‘क्लीन चिट’ या एनओसी (NOC) देने के नाम पर 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
जब महिला के बेटे ने उन्हें फोन किया और उनकी आवाज में घबराहट महसूस की, तब जाकर इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। बेटे के समझाने पर महिला ने पूरी बात बताई, जिसके बाद तुरंत पटना साइबर थाने में मामला दर्ज कराया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी और कार्रवाई
लगभग एक साल की कड़ी मशक्कत के बाद, पश्चिम बंगाल की कल्याणी साइबर पुलिस ने हुगली जिले के श्रीरामपुर से शुभम रॉय नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। शुभम बंगाल में भी एक करोड़ की अन्य धोखाधड़ी के मामले में वांछित था।
आरोपी की पहचान: शुभम रॉय (निवासी: हुगली, पश्चिम बंगाल)
वर्तमान स्थिति: पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी।
सावधानी: पुलिस ने एक बार फिर जनता को सतर्क किया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती हैं।
















