राम मंदिर पर धर्म ध्वजा : महत्व, शुभ मुहूर्त और विशेष बातें

अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या नगरी में आज (25 नवंबर, 2025) वह शुभ घड़ी आ गई है, जब भव्य रूप से निर्मित श्री राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण किया जा रहा है। यह आयोजन प्रभु श्री राम के वैभव और महिमा का प्रतीक है।
अयोध्या नगरी इस महानुष्ठान के लिए पूरी तरह से तैयार है। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनी से प्रभु राम की नगरी जगमगा रही है। मंदिर परिसर को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है। बीती रात मंदिर के शिखर पर प्रभु राम और माता सीता के जीवन पर आधारित लेजर शो ने भक्तों का मन मोह लिया, जिससे मंदिर प्रांगण का दृश्य पूरी तरह से बदल गया है।
प्रधानमंत्री का आज का कार्यक्रम
आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह लगभग 10 बजे सप्तमंदिर और शेषावतार मंदिर जाएंगे। इसके उपरांत, वह मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना करेंगे। दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराएंगे।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने इस विशेष कार्यक्रम के लिए बड़े पैमाने पर लोगों को आमंत्रित किया है, और प्रधानमंत्री के दौरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं।
44 मिनट का अभिजीत शुभ मुहूर्त
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, राम मंदिर पर आज का ध्वजारोहण अभिजीत मुहूर्त में संपन्न होगा।
शुभ मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक (कुल 44 मिनट)।
मान्यता है कि भगवान राम का जन्म इसी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, इसलिए मंदिर पर ध्वजारोहण के लिए यह समय सबसे उत्तम माना गया है।
विवाह पंचमी का महत्व
साधु-संतों के अनुसार, ध्वजारोहण के लिए 25 नवंबर की तारीख का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह दिन मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे विवाह पंचमी भी कहते हैं। त्रेता युग में इसी तिथि को भगवान राम और माता जानकी का विवाह हुआ था। हिंदू पंचांग में हर साल विवाह पंचमी को विवाह के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।
धर्म ध्वजा की विशेषताएँ
राम मंदिर पर फहराई जाने वाली केसरिया रंग की ध्वजा बेहद खास है:
ध्वज की लंबाई: 22 फीट
ध्वज की चौड़ाई: 11 फीट
ध्वजदंड की ऊँचाई: 42 फीट
स्थापना स्थल: 161 फीट ऊँचे शिखर पर
रंग का अर्थ: सनातन परंपरा में केसरिया रंग त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है। यह ज्ञान, पराक्रम और सत्य की विजय का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका रघुवंश के शासनकाल में भी विशेष महत्व था।
ध्वज पर अंकित पवित्र प्रतीक
ध्वज पर तीन विशेष चिन्ह अंकित किए गए हैं:
सूर्य देव: ये विजय और सूर्यवंश (रघुकुल) के प्रतीक माने जाते हैं।
कोविदार वृक्ष: यह प्राचीन ग्रंथों में वर्णित एक दिव्य वृक्ष है। रघुवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से यह प्रतीक अंकित होता आया है। वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर इसका उल्लेख है।
‘ॐ’ (ऊँ): यह सभी मंत्रों का सार और संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है।
मंदिर पर ध्वजारोहण का अभिप्राय
हिंदू धर्म में, मंदिर के शिखर पर ध्वजा फहराने की परंपरा अत्यंत प्राचीन और पवित्र है।
धार्मिक महत्व: गरुड़ पुराण के अनुसार, यह ध्वज देवता की उपस्थिति को दर्शाता है और जिस दिशा में यह लहराता है, वह क्षेत्र पवित्र हो जाता है। यह देवता की महिमा, शक्ति और संरक्षण का प्रतीक भी है।
संदेश: वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में भी ध्वजाओं का वर्णन मिलता है। त्रेता युग में प्रभु के जन्म का उत्सव था, और कलियुग में यह समारोह राम मंदिर के पूर्ण निर्माण की घोषणा है। रघुकुल तिलक के मंदिर शिखर पर लहराती यह ध्वजा पूरे संसार को यह संदेश दे रही है कि अयोध्या में रामराज की पुनर्स्थापना हो गई है।










