महाकाल के अतिथि : सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में विकास की नई इबारत

उज्जैन (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के विकास और आगामी सिंहस्थ मेले की तैयारियों को लेकर एक भव्य दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु केवल आगंतुक नहीं, बल्कि स्वयं महादेव द्वारा बुलाए गए ‘अतिथि’ हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों से आग्रह किया कि वे इन अतिथियों का सत्कार पूरी संवेदना और आत्मीयता के साथ करें।
हाल ही में मुख्यमंत्री ने उज्जैन में लगभग 129 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
युवाओं और कौशल विकास पर केंद्रित नई पहल
मुख्यमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तीन बड़े डिजिटल और शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की:
प्रोजेक्ट स्वाध्याय: स्कूली बच्चों को कम उम्र में कोडिंग और डिजिटल तकनीक सिखाने का अभियान।
UtkarshUjjain.com: युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन और अवसरों का एक साझा डिजिटल मंच।
कौशल सेतु: उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना।
बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी का विस्तार
सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक बनाने के लिए शहर की तस्वीर बदली जा रही है:
रेलवे और हवाई सेवा: ‘चिंतामण गणेश’ को मुख्य रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। मोहनपुरा में एक नया स्टेशन बनेगा और उज्जैन के पास एक भव्य एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है।
सड़कें और मेट्रो: संपूर्ण मेला क्षेत्र को 4-लेन और 6-लेन सड़कों से जोड़ा जा रहा है। इंदौर और उज्जैन के बीच भविष्य में मेट्रो और वर्तमान में वंदे भारत मेट्रो चलाने की योजना है।
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र: उज्जैन अब 14,000 वर्ग किमी के ‘इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया’ का हिस्सा होगा, जो दिल्ली के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनेगा। इसमें शाजापुर, देवास और रतलाम जैसे जिले भी शामिल होंगे।
खेल और पर्यटन को बढ़ावा
एस्ट्रोटर्फ हॉकी: उज्जैन के पुराने हॉकी स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए वहां आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा।
शनि लोक: धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए 140 करोड़ रुपये की लागत से ‘शनि लोक’ का निर्माण किया जाएगा।
मेडिसिटी: उज्जैन को मेडिकल टूरिज्म का केंद्र बनाने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं वाली मेडिसिटी का काम जारी है।
“सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि 30 किलोमीटर लंबे घाटों पर करोड़ों श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कर सकें। इसके लिए 2,675 करोड़ रुपये के 33 प्रमुख कार्यों को स्वीकृति दी गई है।” — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने बताया कि विकास के साथ-साथ उज्जैन की विरासत को भी सहेजा जा रहा है। वैदिक घड़ी, सम्राट विक्रमादित्य होटल का नया स्वरूप और ‘वीर भारत न्यास’ के माध्यम से पुरानी कोठी का जीर्णोद्धार इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। 1980 के बाद यह पहली बार होगा जब कान्ह नदी परियोजना की सफलता के कारण श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कर पाएंगे।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने विकास के इस महायज्ञ में अपना सहयोग देने का संकल्प लिया।
















