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भारतीय दवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई : जे.पी. नड्डा ने ‘इंडियन फार्माकोपिया 2026’ का किया अनावरण

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में भारतीय फार्माकोपिया (IP) 2026 के 10वें संस्करण को देश को समर्पित किया। यह पुस्तक भारत में निर्मित होने वाली दवाओं के मानक तय करने वाली आधिकारिक मार्गदर्शिका है, जो देश की स्वास्थ्य प्रणाली की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में रीढ़ की हड्डी का काम करती है।

वैश्विक मानकों की ओर बढ़ता भारत

विमोचन के अवसर पर श्री नड्डा ने कहा कि यह नया संस्करण न केवल वैज्ञानिक प्रगति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर दवा नियामक क्षेत्र में भारत के बढ़ते वर्चस्व का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुणवत्तापूर्ण दवाओं के उत्पादन में भारत अब अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का पालन कर रहा है।

इस संस्करण की मुख्य विशेषताएं:

नए मानक : इस बार आईपी 2026 में 121 नए मोनोग्राफ जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल मोनोग्राफ की संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है।

गंभीर बीमारियों पर ध्यान: कैंसर, मधुमेह (डायबिटीज), तपेदिक (टीबी) और आयरन सप्लीमेंट जैसी महत्वपूर्ण श्रेणियों के मानकों को और अधिक सख्त और व्यापक बनाया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम: इन मानकों के मजबूत होने से विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी।

‘ग्लोबल साउथ’ में बढ़ती स्वीकार्यता

स्वास्थ्य मंत्री ने भारत की ‘स्वास्थ्य कूटनीति’ (Health Diplomacy) की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय मानकों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है।

“यह गर्व का विषय है कि भारतीय फार्माकोपिया के मानकों को अब विश्व के 19 देशों (विशेषकर ग्लोबल साउथ के राष्ट्रों) में मान्यता प्राप्त हो चुकी है।”

यह कदम न केवल भारतीय फार्मा उद्योग के निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि दुनिया भर में भारतीय दवाओं पर भरोसे को भी मजबूत करेगा।

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