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5 लाख की इनामी महिला नक्सली कमांडर ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, पुलिस के सामने किया समर्पण

धमतरी। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में धमतरी पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जहाँ 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता ने बंदूक छोड़ समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।

बुधवार को धमतरी एसपी कार्यालय में पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार और एएसपी शैलेंद्र कुमार पांडेय के समक्ष उसने आत्मसमर्पण किया।

क्यों बदला मन?

संगठन छोड़ने के पीछे की वजह बताते हुए भूमिका ने कहा कि वह माओवादी विचारधारा के खोखलेपन और संगठन के भीतर होने वाले भेदभाव से तंग आ चुकी थी। उसने बताया कि नक्सली जीवन में पारिवारिक सुख का अभाव है और वहां के कड़े नियमों व शोषण से वह क्षुब्ध थी। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘सिविक एक्शन’ प्रोग्राम और प्रचार अभियानों ने भी उसे आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया।

20 साल का नक्सली सफर

बीजापुर जिले की रहने वाली भूमिका (37 वर्ष) साल 2005 से ही नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थी। उसके लंबे आपराधिक इतिहास के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

प्रशिक्षण: 2005 में शामिल होने के बाद 2010 तक प्लाटून-01 का हिस्सा रही।

सुरक्षा: 2011 से 2019 तक उसने सीसीएम (सेंट्रल कमेटी मेंबर) संग्राम की गार्ड के रूप में काम किया।

नेतृत्व: 2019 में उसे एसीएम बनाया गया और सितंबर 2023 से वह गोबरा एलओएस कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रही थी।

वर्तमान स्थिति: संगठन में घटती संख्या के कारण वह हाल के दिनों में नगरी और सीतानदी एरिया कमेटी के साथ मिलकर काम कर रही थी।

प्रमुख मुठभेड़ों में रही शामिल

भूमिका का नाम पिछले दो दशकों में हुई कई बड़ी नक्सली वारदातों और मुठभेड़ों में सामने आया है:

2010 (ओडिशा): पड़कीपाली मुठभेड़, जिसमें 8 नक्सली मारे गए थे।

2018 (बीजापुर): तिमेनार जंगल में हुई बड़ी मुठभेड़, जिसमें सुरक्षा बलों ने 8 नक्सलियों को ढेर किया था।

हालिया घटनाएं (2024-25): वह धमतरी के एकावरी और मांदागिरी के साथ-साथ नवंबर 2025 में गरियाबंद के सेमरा जंगल में हुई मुठभेड़ों में भी सक्रिय रूप से शामिल थी।

पुनर्वास का लाभ

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली भूमिका को शासन की योजना के तहत सहायता राशि और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वह एक सामान्य और सम्मानित जीवन जी सके।

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