छत्तीसगढ़ : नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में आखिरी कदम, अमित शाह की निगरानी में चल रहा सघन अभियान

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत को नक्सल मुक्त बनाने का सपना अब अपनी पूर्णता की ओर है। देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हिंसा को जड़ से मिटाने के लिए सुरक्षा बलों ने अब ‘अंतिम चरण की मैपिंग’ शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य न केवल नक्सलियों का सफाया करना है, बल्कि दुर्गम गांवों में छिपे हथियारों और घातक आईईडी (IED) के जखीरे को भी पूरी तरह नष्ट करना है।
जनवरी का महीना है निर्णायक
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वर्तमान समय रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर उन सभी संदिग्ध ठिकानों की सूची तैयार की जा रही है जहाँ नक्सलियों के छिपे होने की गुंजाइश है। लक्ष्य यह है कि इसी महीने के भीतर मैपिंग और सैन्य कार्रवाई (Action) के बीच के अंतर को समाप्त कर नक्सल ढांचे को ध्वस्त कर दिया जाए।
‘जीरो इंसिडेंट’ का लक्ष्य
सुरक्षा मामलों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम “नक्सल-मुक्त भारत” के ऐतिहासिक लक्ष्य के बेहद करीब हैं। अब हमारा ध्यान ‘जीरो इंसिडेंट’ (शून्य घटना) पर है। इसका अर्थ है कि किसी भी क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित करने से पहले वहां जमीन के नीचे दबे आईईडी, अवैध हथियारों की खेप और नक्सलियों के लॉजिस्टिक नेटवर्क की सघन जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में हिंसा की कोई संभावना न रहे।
बिखरता नेटवर्क और रिकॉर्ड आत्मसमर्पण
सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और निरंतर ‘एरिया डॉमिनेशन’ के कारण नक्सली संगठनों की कमर टूट चुकी है। आम नागरिकों की हत्या और ब्लास्ट जैसी घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल (2025) की सफलता इस अभियान की गवाही देती है:
विवरण,संख्या (वर्ष 2025)
मारे गए नक्सली,317
गिरफ्तार नक्सली,862
आत्मसमर्पण करने वाले,”1,973″
अमित शाह करेंगे समीक्षा
नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे इस निर्णायक युद्ध की प्रगति रिपोर्ट हर सप्ताह केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसी महीने छत्तीसगढ़ का दौरा कर सकते हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर चल रहे अंतिम चरण के ऑपरेशनों की समीक्षा करना और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाना है।
















