ईरान में गहराया संकट : भारी जन-आक्रोश के बीच इंटरनेट ठप, अब तक 45 ने गंवाई जान

ईरान (एजेंसी)। ईरान इस वक्त भीषण नागरिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। पिछले करीब दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते गुरुवार आधी रात से पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
यह डिजिटल ब्लैकआउट निर्वासन में रह रहे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के उस आह्वान के बाद लागू किया गया, जिसमें उन्होंने जनता से एकजुट होकर सड़कों पर उतरने की अपील की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि शासन इस कदम के जरिए प्रदर्शनकारियों के आपसी संपर्क को तोड़ने और जमीनी हकीकत को अंतरराष्ट्रीय मीडिया से छिपाने की कोशिश कर रहा है।
क्यों सुलग रहा है ईरान?
इस ताजा विद्रोह की चिंगारी 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाजारों से भड़की थी। इसके पीछे मुख्य कारण देश की बदहाल अर्थव्यवस्था है:
मुद्रा में गिरावट: ईरानी रियाल अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
आसमान छूती महंगाई: देश में वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 42% को पार कर गई है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: इजरायल के साथ हुए पिछले युद्ध और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने देश को बिजली संकट और ईंधन की भारी किल्लत में धकेल दिया है।
जान-माल का नुकसान और सरकारी रुख
मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 45 प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं। प्रशासन ने अब तक 2,260 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, ईरान के मुख्य न्यायाधीश ने सख्त लहजा अपनाते हुए कहा है कि व्यवस्था के खिलाफ जाने वालों और बाहरी ताकतों की मदद करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल
अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी प्रशासन को आगाह किया है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के गंभीर परिणाम होंगे। साथ ही, अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को शासन की विफलता बताया है।
दूसरी ओर, 1979 की क्रांति के बाद निर्वासित हुए शाह के बेटे, रजा पहलवी एक बार फिर नेतृत्वकारी भूमिका में नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनों के दौरान लोग न केवल वर्तमान शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं, बल्कि पुराने राजशाही दौर को भी याद कर रहे हैं।
















