बस्तर के जंगलों में अब भी सक्रिय है दुर्दांत पापाराव : आत्मसमर्पित नक्सली ने खोले राज

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच नक्सली संगठन बिखरने लगा है। हाल ही में भारी संख्या में हुए नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने संगठन की अंदरूनी स्थिति को उजागर कर दिया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में शामिल ‘डिविजनल कमेटी मेंबर’ (DVCM) मोहन कड़ती ने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख नाम कुख्यात नक्सली पापाराव का है।
हथियारों के साथ जंगल में छिपा है पापाराव
मोहन कड़ती ने खुलासा किया कि पापाराव वर्तमान में जंगल के भीतर 25 से 30 हथियारबंद लड़ाकों के दस्ते के साथ घूम रहा है। सुरक्षा बलों के कड़े घेरे के बावजूद वह फिलहाल आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं है। उसके साथ राहुल और दिलीप जैसे बड़े कैडर के नक्सली भी सक्रिय हैं।
कौन है पापाराव और क्यों है वह इतना खतरनाक?
सुकमा जिले का मूल निवासी पापाराव नक्सली संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का एक प्रभावशाली चेहरा है। उसके पास संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं:
पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज।
दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सक्रिय सदस्य।
हथियार: वह हमेशा अपने पास एके-47 रखता है।
पापाराव की सबसे बड़ी ताकत बस्तर के दुर्गम भूगोल की गहरी समझ है। ‘जल-जंगल-जमीन’ के रास्तों से वाकिफ होने के कारण वह अक्सर मुठभेड़ के दौरान बच निकलने में सफल रहता है। जानकारों का मानना है कि यदि पापाराव पकड़ा जाता है या मारा जाता है, तो पश्चिम बस्तर में नक्सली नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
पुलिस की रणनीति: ‘सरेंडर या एनकाउंटर’
बस्तर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पापाराव की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। प्रशासन की ओर से लगातार आत्मसमर्पण की अपील की जा रही है, लेकिन साथ ही स्पष्ट संकेत हैं कि यदि नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटते, तो सख्त सैन्य कार्रवाई तय है।
लक्ष्य 2026: शासन ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य रखा है। इसी कड़ी में पुलिस ने सर्च ऑपरेशन और एंटी-नक्सल अभियानों को और अधिक तेज कर दिया है।
















