भारत-अमेरिका व्यापार समझौता : अमेरिकी वाणिज्य सचिव का चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत न हो पाने के कारण यह समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका।
“एक फोन कॉल की दूरी” पर थी डील?
एक हालिया पॉडकास्ट में चर्चा के दौरान लटनिक ने बताया कि व्यापारिक समझौते की रूपरेखा लगभग तैयार थी और अंतिम निर्णय पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के हाथों में था। लटनिक के अनुसार, इस डील को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बस एक औपचारिक फोन कॉल करना था, जो नहीं हुआ। इसी संवाद की कमी के चलते यह महत्वपूर्ण अवसर हाथ से निकल गया।
अन्य देशों के साथ बढ़ती नजदीकी
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि भारत के साथ बातचीत आगे न बढ़ने के तुरंत बाद वाशिंगटन ने वियतनाम, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापारिक समझौतों की झड़ी लगा दी। यह संकेत देता है कि अमेरिका तेजी से अन्य विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
दावों पर उठते सवाल और जमीनी हकीकत
हालांकि, विशेषज्ञों ने लटनिक के इन बयानों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। जुलाई 2025 के दौरान अमेरिका की कई अन्य देशों (जैसे ब्रिटेन, जापान और यूरोपीय संघ) के साथ भी टैरिफ को लेकर गहन चर्चा चल रही थी।
टैरिफ का गणित: अमेरिकी दावों के विपरीत, जिन देशों ने जल्दी समझौते किए, उन्हें भी भारी करों से राहत नहीं मिली है।
वियतनाम का उदाहरण: वियतनाम ने अमेरिका के साथ बहुत पहले बातचीत पूरी कर ली थी, फिर भी उस पर 20% जैसा उच्च टैरिफ लागू है। यह आंकड़ा लटनिक के उस तर्क को कमजोर करता है जिसमें कहा गया था कि जल्दी डील करने वालों को विशेष लाभ मिलेगा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों की डोर अभी भी पेचीदा कूटनीतिक और आर्थिक समीकरणों में उलझी हुई है।
















